कभी सुना है भटके हुए देवताओं के मंदिर भी हो सकते हैं? जी हाँ; सही सुना आप ने। हरिद्वार में है भटके हुए देवता के मंदिर। मनुष्य भटका हुआ देवता और उठा हुआ पशु है। मनुष्य योनि श्रेष्ठ योनि है। उसे बुद्धि से सोचने की अद्भुत क्षमता मिली हुई है। मनुष्य सृष्टि का मुकुटमणि कहलाता और प्रकृति का अधिष्ठाता होने का दम भरता है, तो भी यह नहीं समझा जाना चाहिए कि अन्य प्राणियों को सृष्टा ने कोई विशेषताएं नहीं दी हैं। वे अनेक प्रसंगों में विशेषतया अतीन्द्रिय क्षमताओं के संबंध में मनुष्य से कहीं आगे हैं।
इन बातों को ध्यान मे रखकर गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने शांतिकुंज आश्रम में गायत्री माता के विशाल मंदिर परिसर मे यह मंदिर बनवाये हैं। यहाँ आने वाले साधक इस मंदिर में ध्यान करते हैं। अब इस मंदिर के अंदर मूर्ति की बात करें तो आप सुनकर हैरान हो जायेंगे। क्योंकि यहां सिर्फ और सिर्फ 5 बड़े बड़े आइने (कांच) लगे हैं और उनमें आत्मबोध, तत्वबोध कराने वाले वेद-उपनिषदों के मंत्र लिखे हैं।