जय का घर और ऑफिस नीलाम होने जा रहा था। पिछले दस साल में अपना व्यवसाय खड़ा करने के लिए जय ने बाजार से काफी पैसा कर्ज ले लिया था, जिसे अब वह नहीं चुका पा रहा था। पिछले काफी दिनों से बैंक उसे चेतावनी दे रहा था, पर वह कुछ नहीं कर पाया। अपनी जिंदगी में जय ने जो कुछ भी बनाया था, जो भी हासिल किया था, वह कुछ ही पलों में खत्म होने वाला था। लेकिन तभी बैंक के एक अफसर का उसके पास फोन आया, जिसने उसे बताया कि उसकी दोस्त ममता ने उसका सारा कर्ज चुका दिया है। जय हैरत में था। एक तरफ उसे खुशी भी हो रही थी कि उसका घर और ऑफिस नीलाम होने से बच जाएगा, दूसरी तरफ यह भी लग रहा था कि ममता ने ऐसा क्यों किया, एकाएक वह इतने पैसे कहां से लाई?
जय तुरंत ममता को धन्यवाद कहने उसके घर पहुंचा। जय ने देखा कि वह अपना सारा सामान लेकर कहीं जा रही है। उसे समझ में आ गया था कि जय के लिए उसकी दोस्त ने अपना घर बेच दिया। जय ने उससे पूछा, तुमने आखिर ऐसा क्यों किया? ममता मुस्कराते हुए कहने लगी, तुम्हें पता है, कुछ साल पहले मैं किस तरह मौत के मुंह में पहुंच गई थी। अस्पताल में भर्ती होने पर पता चला कि उसी रात मुझे खून देना होगा। किसी ब्लड बैंक में मेरे ब्लड ग्रुप का खून नहीं था। तुम जानते थे कि हमारा ब्लड ग्रुप एक है, इसलिए उसी रात आकर, खून देकर तुमने मेरी जान बचाई थी।
बाद में पता चला कि तुम डॉक्टर से कह रहे थे कि चाहे जितनी भी जरूरत हो, शरीर से खून निकाल लिया जाए। उस रात तुम न आते, तो शायद आज मैं जिंदा नहीं होती। मैंने तो सिर्फ अपना घर ही बेचा है। घर तो दोबारा भी बनाया जा सकता है न? यह किसी की जिंदगी बचाने से ज्यादा कीमती को नहीं! यह सुनकर जय दो मिनट के लिए एकदम खामोश हो गया था। उसने ममता से वायदा किया कि अब उसका घर जय वापस बनवा कर देगा।