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स्त्रियों के सम्मान के लिए बुनियादी सुधार जरूरी

Sat, 05 Jan 2013 01:37 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
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ओशो वर्ल्ड पिछले दस सालों से पहली जनवरी को हास्य दिवस के रूप में मनाता आ रहा है। इस वर्ष भी इस कार्यक्रम का आयोजन ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, अंसल प्लाजा में मनाया गया। लेकिन इस बार हंसी-ठहाकों के बजाय मौन छाया रहा है।
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पहली जनवरी को आशो वर्ल्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इस वर्ष खामोशी छायी रही। लोगों ने मौन धारण करके 16 दिसम्बर को बंसत विहार क्षेत्र हुए दुष्कर्म की घटना के विरोध में मौन धारण किया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर ध्यान कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था।

कार्यक्रम में उपस्थिति लोगों ने देश में महिलाओं की स्थिति पर चिंता प्रकट की और कहा कि जिस देश में संसार को प्रेम और ज्ञान की रोशनी देने वाले महापुरूषों कृष्ण, महावीर, बुद्ध, मीरा और नानक का जन्म हुआ उस देश में आज ये महापुरूष शर्म से सिर झुकाये खड़े हैं। इसका मात्र कारण यह है कि आज लोग इनकी दी हुई शिक्षा को भूल चूके हैं।
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लोगों ने इस अवसर पर आशो के शब्दों को भी दुहराया। ओशो ने कहा' संसार में पहले कभी इतना कठिन क्षण नहीं आया था। अगर धार्मिक चेतना लोगों तक नहीं पहुंचायी गयी तो मनुष्य बर्बाद हो जाएगा। लेकिन मुझे आशा है कि धार्मिक चेतना प्रबल होगी और मनुष्य इस खतरनाक क्षण को पार करके इससे बाहर आ जाएगा जो कहीं अधिक मानवीय, उच्च और बेहतर होगा।

ओशो के अनुयायियों ने कहा कि देश में आर्थिक सुधार का मुद्दा दूसरे स्थान पर आता है सबसे अहम है महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा। इसके लिए देश को युवाओं के साथ हाथ में हाथ मिलाकर बुनियादी बदलाव लाने की जरूरत है। अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया हमारी सरकार को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर अयोग्य और असमर्थ होने का आरोप लगा रही है। दूसरी ओर बलात्कार और महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता के लिए भी भारतीयों के कठोर रवैये को भी दोषी मान रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि वर्तमान स्थिति ऐसी है जब देश में सबकुछ गलत लग रहा है। देश में बुनियादी सुधार की जरूरत है। हमारे कानूनों में मौलिक परिवर्तन की आवश्यक्ता है। पुलिस, शिक्षा, सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बदलाव होने की जरूरत आन पड़ी है। लोगों को मनोवैज्ञानिक शिक्षा और ध्यान का ज्ञान भी देना जरूरी है।
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