सेहत बनी रहे, इसके लिए हरे रंग की सब्जी, साबुत अनाज, फल आदि खाने की सलाह चिकित्सक देते हैं। यह शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व तो देते हैं, इनका संबंध आपके ग्रहों से भी जुड़ा होता है। आप जो खा रहे हैं, वह जीवन में खुशियां ला सकता है और बाधा भी खड़ी कर सकता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सफेद रंग संबंध शुक्र से, लाल रंग का मंगल से, हरे रंग का बुध से, पीले रंग का बृहस्पति से, नीले या काले रंग का शनि से होता है। यदि आप हर रंग की सब्जियों का अपने भोजन में शामिल करेंगे, तो हर ग्रह का प्रभाव आपके शरीर पर पड़ेगा। जिस ग्रह से संबंधित चीजों की शरीर में कमी होगी, शरीर अपने आप उसे ग्रहण कर लेगा और आपका स्वास्थ ठीक रहेगा, मन खुश रहेगा।
अथर्ववेद संहिता में कई वनस्पतियों, फलों और सब्जियों को रत्न का दर्जा दिया गया है। यह वनस्पतियां, फल और सब्जियां हमारे शरीर, मन और जीवन के लिए बहुत बहुमूल्य हैं। उनका सही तरीके से प्रयोग किया जाए, तो हम स्वस्थ रहेंगे और अपना कर्म अच्छे से कर पाएंगे। बहुत से लोग भोजन में तीखा या तेज मसाले ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे जीवन पर मंगल ग्रह का प्रभाव तेजी से बढ़ता है। यदि आप सरसों का साग, कटहल की सब्जी या अचार ज्यादा खा रहे हैं, तो मंगल ग्रह का असर आपके शरीर, मन और जीवन पर बढ़ रहा है, क्योंकि इनका संबंध मंगल ग्रह से है।
यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति अनुकूल है या मंगल कुंडली में कमजोर है, तो यह चीजें शुभ फल देंगी। लेकिन यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति ठीक नहीं है, तो मंगल से संबंधित खान-पान से आपके जीवन में नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। बीमारी, व्यापार में हानि, क्रोध की वजह से आपको नुकसान हो सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य का संबंध नारियल, खजूर, केसर, बड़ी इलायची से है। चंद्रमा का संबंध पानी वाले नारियल, लीची, खरबूजा, तरबूज, खीरा, नींबू, खुशबूदार बासमती चावल से है। मंगल का संबंध लाल मिर्च, काली मिर्च, जायफल, लौंग, तीखे मसाले, सरसों का साग, कटहल, सोयाबीन से है। बुध का संबंध सूरन, अदरक, पालक, बथुआ, मेथी, सीताफल, बैंगन, पान और गन्ने से है। गुरु का संबंध अनाज, हल्दी, सिंघाड़े से है। शुक्र का संबंध सभी फूलदार वनस्पति, जमीन के भीतर बढ़ने वाली सब्जियां, जैसे आलू, गाजर, प्याज से है। शनि का संबंध साबुत दालें, कसैले खट्टे स्वाद वाले फल आंवला, संतरा, बेलफल से है। जहरीले पौधे और ऐसे फल, जिन्हें खाया नहीं जा सकता है का संबंध राहु-केतु से होता है। आपकी राशि में जो ग्रह कमजोर है, उसके हिसाब से खानपान होगा, तो ग्रहदोष तो शांत होगा ही, सेहत भी सुधरेगी।
किस तरह के आहार का सेवन करें
मेष, सिंह, वृश्चिक राशि वाले उग्र प्रकृति अर्थात गर्म स्वभाव के होते हैं, तो उनमें पित्त प्रधान होता है। वृषभ, कर्क, तुला, धनु, मीन राशि वालों का स्वभाव सुस्त होता है तो उनमें कफ प्रधान होता है। मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि की प्रकृति हवादार होती है, तो उनमें वात तत्व प्रधान होता है। जब वात अधिक हो, तो अनाज, सेम, जड़ वाली सब्जियां, बीज, नट और डेयरी उत्पादों जैसे पोषक आहार को खाएं। इसके साथ ही अदरक, दालचीनी, इलायची जैसे हल्के मसालों का प्रयोग करें। जब कफ बहुत अधिक हो, गुड़, शहद लेना चाहिए। गरम मसाले जैसे अदरक और काली मिर्च का उपयोग, वजन कम करने में मदद करता है। जब पित्त काफी ज्यादा हो तो, कड़वे, कसैले और मीठी जड़ी-बूटियों के खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। अच्छे ग्रह उपचार के लिए ठंडे मसालों जैसे हल्दी और धनिया का भी उपयोग किया जा सकता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, रविवार के दिन काले चने बनाने चाहिए। सोमवार के दिन खीर या दूध से बने अन्य पकवान बनाना लाभकारी होता है। मंगलवार के दिन मीठा चूरमा या सूजी का हलवा पकाना चाहिए। बुधवार के दिन हरी सब्जी या हरी दाल बनाना शुभ है। गुरुवार के दिन पीला भोजन, जैसे चने की दाल या बेसन से बनी कोई वस्तु लाभकारी है। शुक्रवार के दिन दही में चीनी डालकर खाना शुभ फल देता है। शनिवार के दिन उड़द की दाल या तले हुए भोज्य पदार्थ खाने चाहिए। ग्रहों के अनुसार भोजन पकाना निश्चित रूप से आपको शुभ फल प्रदान कर सकता है।
खुला पन्ना डेस्क, अमर उजाला से साभार