फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच मंत्र जिनसे आप सफलता की ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं

Sat, 15 Nov 2014 03:51 PM IST
श्रीकृष्णचंद्र भट्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
योग में पांच यम, पांच नियम, जैन परंपरा में पांच महाव्रत और बौद्ध धर्म के पांच शील प्रसिद्घ हैं। आज को दौर में उनके नए संस्करण जरूरी हैं। यम नियम और पंच महाव्रत या शील निजी जीवन को संस्कारित करने और सुगठित बनाने के लिए है। परंतु उनका शुद्धतम अर्थों में पालन करना कठिन है।
विज्ञापन


बेहतर है कि पहले व्यावहारिक पंचशीलों को व्यवहार में शामिल रखा जाए। पारंपरिक योगसाधना में शामिल पंचशीलों को सुबोध अर्थों में समझना चाहें तो उन्हें श्रमशीलता, मितव्ययिता, शिष्टता, सुव्यवस्था और सहकारिता के नाम दे सकते हैं। नए पंचशीलों के नाम इस प्रकार हैं-

श्रमशीलता - आरामतलबी की बजाए श्रम करने में बड़प्पन अनुभव करें। तत्परता और तन्मयता भरे परिश्रम से जोड़ कर दिनचर्या बनाई जाए।

मितव्ययता - अमीरी के प्रदर्शन से सम्मान नहीं मिलता, ईर्ष्या ही उपजती है। लिहाजा कम खर्च में काम चलाते हुए सादा जीवन उच्च विचार का नीति को अपनाया जाए। जरूरतमंदों की सेवा में लगाएं।
विज्ञापन


शिष्टता - कहा जाता है कि शालीनता बिना मोल मिलती है, परन्तु उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है।

सुव्यवस्था - समय, श्रम, मनोयोग, जीवनक्रम, शरीर, सामर्थ्य का सुनियोजन करें। उन्हें ऐसे संभाल कर रखना चाहिए कि उनका समुचित लाभ उठाया जा सके।

सहकारिता -  मिल- जुलकर काम करना। परिवार, कारोबार, लोकव्यवहार में, सामंजस्य, साथ-साथ काम करने की प्रवृत्ति बनी रहे। एकाकी  और नीरसता, निराशा भरे वातावरण से बचें।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें