किशन अपने दादा जी के साथ शाम की सैर पर निकला था। दादा जी अब काफी वृद्ध हो गए थे, इसलिए वह किशन के बिना कहीं नहीं निकलते थे। किशन ने दादा जी से पूछा, दादा जी, कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि हमें उसका कोई हल नजर नहीं आता। ऐसे में, हमें क्या करना चाहिए? दादा जी ने पूछा, क्या हो गया किशन, ऐसी क्या बात हो गई, जिससे तुम इतने परेशान हो? किशन बोला, दादा जी, अगले हफ्ते आईआईटी की परीक्षा है। लेकिन कल मेरा एक बहुत करीबी दोस्त अगले दो वर्षों के लिए लंदन जा रहा है। उसने पार्टी रखी है। मैं अगर पार्टी में नहीं गया, तो वह बुरा मान जाएगा।लेकिन पार्टी में जाने पर मेरा काफी समय नष्ट हो जाएगा। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा। दादा जी जोर-जोर से हंसने लगे और बोले, ऐसी चुनौतियां तो जिंदगी में रोज-रोज आती रहेंगी।
कई बार तो ऐसा हो जाता है कि हर तरफ सिर्फ चुनौतियां ही दिखाई पड़ती हैं। उनसे निकलें कैसे, यह समझ में नहीं आता। चलो, मैं तुम्हें एक उदाहरण देकर समझाता हूं कि ऐसी, या इससे भी कठिन चुनौतियों के समय क्या करना चाहिए। सोचो कि तुम सड़क पर गाड़ी चला रहे हो। लेकिन अचानक सड़क पर जाम लग जाता है। तुम सोचोगे कि कहीं दाएं-बाएं करके निकल जाऊं। पर तुम्हारे साथ-साथ जो दूसरे लोग गाड़ी चला रहे हैं, वे भी यही सोचेंगे। और अंत में होगा यह कि जल्दी निकलने के चक्कर में लोग रास्ता जाम कर देंगे। किशन बोला, हां, दादा जी, मैने ऐसा कई बार देखा है। दादा जी बोले, यही हाल हमारे दिमाग का भी होता है, जब सभी रास्ते जाम हो जाते हैं। ऐसे में हम जब तक गाड़ी में बैठे रहेंगे, हमें रास्ता नहीं सूझेगा। हमें उस पूरी परिस्थिति का जायजा लेने के लिए उससे ऊपर उठकर देखना होगा। तब उसका हल सूझेगा। यानी अपने आप से ऊपर उठकर, उससे बाहर निकलकर चुनौतियों को देखो, तो रास्ता खुद-ब-खुद मिल जाएगा।