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सीख: परेशानियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, जिंदगी पर कभी हावी न होने दें

Tue, 23 Jan 2018 11:25 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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कुंदन और उसकी पत्नी रिया का दिन बहुत खराब था। कुंदन ने शेयर बाजार में लाखों रुपये लगा रखे थे। उस दिन रिया को फोन आया कि कुंदन के सारे पैसे डूब चुके हैं और बहुत सारे पैसे अभी कुंदन को भरने बाकी हैं। यह सुन रिया के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी सारी जमा पूंजी शेयर बाजार में नष्ट हो गई। उस दिन वे अपनी गाड़ी भी देनदारों को देकर लोकल ट्रेन से वापस घर लौट रहे थे। रिया कुंदन से बहुत नाराज थी। कुंदन मन ही मन घुट रहा था कि उसकी एक गलती की वजह से अब तक की सारी मेहनत बेकार हो गई। तभी एकाएक ट्रेन में कुछ नए यात्री चढ़े। उनमें ज्यादातर वृद्ध ही थे। उनमें से एक ने कहा, चलो शुरू करें, और सारे के सारे गाने-बजाने लगे। कुछ ही देर में उस कंपार्टमेंट का पूरा माहौल बदल गया। एक बूढ़े बाबा ढोलक बजा रहे थे, और बाकी सारे गा रहे थे, और कुछ तो नाच भी रहे थे।

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उनके चेहरों पर खुशी झलक रही थी। कंपार्टमेंट के यात्री भी इस सुंदर दृश्य का आनंद ले रहे थे, यहां तक कि कुछ बूढ़े लोग भी उनके गानों पर झूम रहे थे। कुछ युवा तो साथ में नाचने भी चले गए थे। रिया कुछ देर तक उनको देखती रही, फिर उनमें से एक से रिया ने जाकर पूछा, आप सब इतने अनुभवी हैं, इतना कुछ देखा होगा अपनी जिंदगी में, फिर भी आप ऐसे तमाशे करते हैं! इस तरह नाचने-गाने से आपको क्या मिलता है? क्या आप लोगों को अपनी इज्जत का जरा भी ख्याल नहीं है? रिया की बात सुनकर वह शख्स समझ गया कि वह परेशान है। वह शख्स बोला, जिन बुजुर्गों को आप नाचते-गाते देख रही हैं, ये सब अपने समय के काफी सफल लोग रहे हैं। इन्होंने खूब पैसे कमाए, घर बनाया, पर एक दिन इनके अपने बच्चों ने ही इन्हें अलग कर दिया। इनके पास न अपनी कमाई बची, न अपना घर, और न वे बच्चे, जिनके लिए इन्होंने सब कुछ न्योछावर कर दिया। लेकिन अब ये लोग खुश हैं, क्योंकि इन्होंने जिंदगी को हर तरह से स्वीकार लिया है।
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अमर उजाला के हरियाली और रास्ता से साभार

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