सिमी मैम की कहानी, जिन्होंने अपने स्टूडेंट्स को दो अनोखे सवालों के जरिये बड़ी सीख दी।
हर बार की तरह टीचर सिमी ने एक बार फिर पूरी क्लास को स्कूल के बगीचे में बुलाया। सभी छात्रों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी, क्योंकि सबको पता था कि सिमी मैम एक बार फिर कुछ अलग सिखाने वाली हैं। सब छात्रों ने अपनी-अपनी जगह ले ली और क्लास शुरू हुई। सिमी मैम ने पूछा, तो चलो बताओ, आपको अपने चारों तरफ क्या दिख रहा है। कुछ छात्रों ने बोला, फूल, कुछ ने बोला पेड़, कुछ ने बोला कीचड़, कुछ ने बोला घास।
सिमी मैम बोलीं, आज की पहली सीख यही है कि हर किसी के देखने का नजरिया अलग होता है। हर कोई अलग तरह से सोचता है और इसीलिए उसे वही चीज अलग-अलग तरह से दिखाई देती है। अब मेरा अगला सवाल है कि आप में से कितने ऐसे लोग हैं, जिन्हें ऐसा लगता है कि आप के परिवार में कोई न कोई ऐसा है, जिससे आपकी नहीं बनती। इस बात में एक-एक कर के एक दूसरे की देखा-देखी हर छात्र ने अपना हाथ खड़ा कर दिया। मैम बोलीं, यही है आज की आपकी सबसे बड़ी सीख। अक्सर हमारे परिवार में हमारे पिता, या मां या चाचा या दादाजी ऐसे ही होते हैं, जिनसे हमारा बात करने का मन नहीं करता।
क्या ऐसा आपके साथ भी होता है? सारे छात्रों ने अपना-अपना अनुभव साझा करना शुरू कर दिया। किसी के पिता कुछ ज्यादा ही कड़क, तो किसी के दादाजी, किसी की चाची खड़ूस, तो किसी की मामी। सिमी मैम बोलीं, गुलाब की सुगंध चाहे कितनी भी मनमोहक हो, लेकिन उसके कांटे उतने ही चुभने वाले होते हैं। फूलों के रंग चाहे कितने भी खूबसूरत हों, वह खिलते उसी जमीन के गंदी सी मिट्टी में हैं। कुछ तो कीचड़ में भी खिलते हैं। उन कांटों का, मिट्टी और कीचड़ का एक बहुत बड़ा योगदान होता है उन फूलों को मनमोहक बनाने में। जो इस बात को समझ ले, वह आज के ज्ञान को समझ गया।