जोखिम उठाने की आदत डालिए उम्मीदें पूरी होगी। बहुत कुछ जोखिम उठाने की प्रवृत्ति आमतौर पर जिंदगी की रफ्तार बढ़ा देती है। हालांकि उनसे नुकसान भी होता हैं, लेकिन अंततः पुरस्कार भी उन्हें ही मिलता हैं।
ब्रिटेन की मनो-आध्यात्मिक संस्था ‘इनर स्ट्रेंग्थ सोसायटी’ के जॉन स्टुअर्ट फ्रेशर ने एक छोटा सा उदागरण दिया है और कहा कि कैसिनो यानी जुआघर में जुआ खेलने वाले जुआरियों के बारे में सोचिए। वे अपना सारा पैसा एक ही दांव में गवां भी दे सकते हैं और मोटी रकम जीत भी सकते हैं।
असल में कुछ लोगों में 'रोमांच' जोखिम उठाने की प्रवृत्ति होती है। यह प्रवृत्ति अंतःप्रेरणा से आती है। फ्रेशर का कहना है कि जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अध्यात्म क्षेत्र में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। वहां तो सीधे शून्य में छलांग लगानी होती है और कुछ निश्चित भी नहीं होता।
सोसायटी की प्रयोगशाला और दूसरी जगहों पर भी कई अध्ययन हुए हैं जिनमें यह पड़ताल की गई कि जोखिम उठाते समय लोगों का कैसा व्यवहार होता है? पता चला कि वे जीन्स जो दिमाग के क्रियाकलापों की भिन्नता का कोड बनाते हैं उतने ही भिन्न होते हैं जितना कि हमारा व्यवहार भिन्न होता है।
अनुसंधान से पता चला कि कुछ लोगों में खुशी हासिल करने की इच्छा दूसरों से ज्यादा होती है और ऐसा लगता है की यह फितरत आनुवांशिक भी है। जैसे कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जो एक बार स्काईडाइविंग करेंगे तो सुरक्षित धरती पर पहुंचकर धरती को चूमेंगे ईश्वर का धन्यवाद करते हुए की बचा लिया भगवन।
वहीं कुछ लोग ऐसे होंगे जो फिर से हवाई जहाज में सवार हो जाएंगे ताकि फिर से कूद लगा सकें। हालांकि सतही तौर पर लग सकता है कि जोखिम उठाने में लाभ के बजाय हानि या नुक्सान ही ज्यादा है। लेकिन यह भी सच है कि इस भावना ने इंसान के जीवित बचे रहने में खूब योगदान दिया है तभी उसका विकास हुआ और वह दुनिया के हर कोने में पहुंच सका।