देश के एक जाने-माने मेडिकल कॉलेज में कॉन्वोकेशन दिवस था। डिग्री देने के लिए दिग्गज डॉक्टरों को बुलाया गया था। उसमें से एक थे डॉक्टर चौहान, जिनकी ख्याति विश्व में मशहूर थी। उन्होंने अपने पैसों से दुनिया के कई बड़े देशों में अस्पताल बनवाए थे। उनके खास आग्रह पर उन्हें पास हो रहे छात्रों से पंद्रह मिनट बात करने का मौका दिया गया। डॉक्टर चौहान बोले, आप सबको देख मुझे अपने दिन याद आ गए। मुझमें और आप में कोई फर्क नहीं है। पर मै चाहता हूं कि आप मेरे जैसे बिल्कुल न बनें। यह सुन सारे छात्र हैरान रह गए।
वह बोले, मुझे पता है कि यहां मौजूद हर छात्र मुझे अपना आदर्श मानता होगा। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि सफलता और समृद्धि के लिए ही हम इतनी मेहनत करते हैं। पर मैंने आपको मेरे जैसा न बनने के लिए इसलिए कहा है, क्योंकि इस सफलता और समृद्धि की कीमत होती है, जो मैने चुकाई है। मेरी मां ने अपना पूरा जीवन मेरे इंतजार में निकाल दिया। उनको मैंने सब कुछ दिया, पर अपना समय कभी नहीं दे पाया। मेरे पिता का जब देहांत हुआ, तो उनकी चिता को अग्नि तक देने के लिए मैं मौजूद नहीं रह पाया। मेरे दो बच्चे भी हैं, पर इसका एहसास भी मुझे तब हुआ, जब उनकी शादी हुई। मैं कब इंसान से रोबोट बन गया, मुझे पता ही नहीं चला।
पिछले हफ्ते मैं अपना सारा काम छोड़ जिंदगी में पहली बार पत्नी के साथ शाम बिताने के लिए घर वापस लौटा। हमने इतनी बातें जीवन भर नहीं कीं, जितनी उस एक शाम को कीं। मैंने तय कर लिया कि अब मैं अपना समय सिर्फ अपने परिवार को दूंगा। पर अगले दिन सुबह ही मेरी पत्नी की हार्ट अटैक में मृत्यु हो गई। वह डॉक्टर जिसने उसका इलाज किया, वह शायद उसे बचा सकता था। पर ऑपरेशन करते वक्त उसके हाथ कांपने लगे। वह डॉक्टर कोई और नहीं, मैं था। जिस दिन का मैंने जिंदगी भर इंतजार किया, वह मेरे हाथ में आने से पहले ही चला गया।