जब पौधे अपने भीतर का उल्लास संभाल नहीं पाते, तो वे फूलों के रूप में उसे व्यक्त कर देते हैं। जीवन भी इसी तरह है, लेकिन कुछ फर्क है। एक स्थिति में आप नृत्य करते हुए आनंद प्राप्त करते हैं, जबकि दूसरी स्थिति में आप अपने आनंद को नहीं संभाल पाने पर नाचने लगते हैं। अपने आस-पास देखिए, जीवन कैसे चलता है ? जो लोग खुशी का दिखावा करते हैं, उन्हें इस काम में जबरदस्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इससे कई रोग और परेशानियां पैदा हो जाती हैं।
हमें किस तरह का रवैया और भावना रखनी चाहिए? जवाब है कि सभी भाव अच्छे हंै। अगर आप गुस्सा करना चाहते हैं, तो लगातार गुस्सा कीजिए। अगर आपको प्रेम करना पसंद है, तो निरंतर प्रेम कीजिए। जो भी करना चाहें लगातार कीजिए, फिर देखिए आपको अच्छी अनुभूति होगी। आप जिस तरफ भी जाना चाहते हैं, वह दिशा तय कर लीजिए। रोज-रोज अपनी दिशा मत बदलिए।