वैभव सिंह का बेटा आर्यन शहर के एक नामचीन स्कूल में पढ़ता था। एक दिन जब आर्यन घर वापस लौटा, तो वैभव ने देखा उसके पैरों पर लाल निशान पड़े हैं। वैभव को लगा, शायद कहीं खेलते-खेलते चोट लग गई होगी। वैभव ने जब आर्यन से पूछा, तो आर्यन बात टालकर खेलने चला गया। वैभव ने मन ही मन सोचा, अगर कुछ खास होता, तो आर्यन खुद ही बता देता। लगभग छह महीने बाद एक दिन जब वैभव आर्यन को छोड़ने स्कूल पहुंचा, तो उसने देखा कि स्कूल के बाहर काफी भीड़ जमा है। पता चला कि आर्यन की क्लास के एक बच्चे ने एक टीचर पर शारीरिक शोषण का इल्जाम लगाया है।
वैभव यह सुनकर एकदम दंग रह गया। जिस टीचर पर इल्जाम था, वह वैभव का अच्छा दोस्त था। वैभव के लिए उसके खिलाफ कुछ भी सुनना बहुत मुश्किल था। वह सोचने लगा, यह कल्पना भी मुश्किल है कि एक चार साल के बच्चे के साथ ऐसा कुछ हो सकता है! उस बच्चे से ज्यादा वैभव को उन लोगों पर गुस्सा आ रहा था, जो उस बच्चे के साथ खड़े होकर हमदर्दी जता रहे थे। वह तुरंत आर्यन को लेकर वापस घर चला गया। रास्ते में वैभव के मोबाइल पर लोगों के कॉल आने लगे। आर्यन वैभव को फोन पर बात करते सुन रहा था।
वैभव फोन रखकर बोला, कुछ भी बोलते हैं लोग। पीछे से आर्यन बोला, पापा, टीचर बैड बॉय हैं न। वैभव एक पल के लिए सन्न रह गया। वैभव की आंखों के सामने वह लाल निशान नजर आने लगे, जो उसने छह महीने पहले देखे थे। उसने अपनी गाड़ी किनारे रोकी और आर्यन से बात की। तब उसे पता चला कि आर्यन भी उस शोषण से गुजर चुका है। वैभव के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई। अब उसे स्वयं पर ग्लानि हो रही थी। स्कूल ने खुद उस शिक्षक को सजा दिलवाई, लेकिन वैभव कई वर्षों तक शर्मिंदा रहा।