Amar Ujala Samwad Uttarakhand 2026
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मनुष्य जैसा तन, भारत जैसा वतन और सनातन मिलना है सौभाग्य
देवी चित्रलेखा ने सभी को गंगा दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, हमें अपने जीवन को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा जन्म, भारत जैसा देश और सनातन जैसा धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। इससे अधिक भाग्यशाली स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़ी पूंजी हमारा शरीर और यह मानव जीवन है, इसलिए इसकी महत्ता को समझना जरूरी है। आज के समय में लोग धन कमाने की दौड़ में इस तरह उलझ गए हैं कि जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता। इंसान पैसे कमाने निकल जाता है और जब तक धन आता है, तब तक बहुत कुछ पीछे छूट चुका होता है। कई बार बच्चों के साथ बैठने का समय नहीं मिलता और जब समय मिलता है, तब बच्चे खुद अपनी जिंदगी की दौड़ में निकल चुके होते हैं।
देवी चित्रलेखा ने कहा कि कमाई करना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि समाज से जो कुछ हमें मिला है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी उतना ही आवश्यक है। जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस संसार में दान के कई रूप हैं, जैसे कन्यादान, अन्नदान, रक्तदान और सेवा।
रोजाना करना चाहिए रक्तदान
उन्होंने आगे कहा कि रक्तदान केवल शरीर से दिया जाने वाला दान ही नहीं होता, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशी और उत्साह भरना भी एक तरह का रक्तदान है। उन्होंने एक महापुरुष की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति खुश रहता है, तो उसके शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। इसलिए हमें प्रतिदिन कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे सामने वाला प्रसन्न हो, लोगों के जीवन में आनंद आए और हमारे कारण किसी के चेहरे पर मुस्कान आए। यही जीवन की सच्ची सार्थकता है।
मनुष्य का गुण है बांटना
संवाद को आगे बढ़ाते हुए देवी चित्रलेखा ने कहा कि, मनुष्य अपने जीवन के अधिकांश गुण दूसरों से सीखता है, लेकिन एक गुण ऐसा है जो व्यक्ति को स्वयं अपनाना होता है और वह है दूसरों की सहायता करना तथा अपने हिस्से की खुशियां बांटना। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक सुंदरता इसी बात में है कि हम अपने पास मौजूद अच्छाइयों को दूसरों के साथ साझा करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज गंगा और यमुना पूजनीय इसलिए मानी जाती हैं, क्योंकि वे बिना किसी भेदभाव के निरंतर सबको देती रहती हैं। उनका स्वभाव केवल बांटना है और यही कारण है कि उन्हें सम्मान और श्रद्धा मिलती है। देवी चित्रलेखा ने कहा कि जो व्यक्ति बांटना जानता है, वही वास्तव में मधुर स्वभाव वाला होता है और समाज में वही सबसे अधिक सम्मान पाता है।