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चाणक्य नीति: युवावस्था में इन बातों का ध्यान रखने वालों को मिलती है जीवन में सफलता

Tue, 02 Jun 2020 08:13 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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युवावस्था जीवन का सबसे अहम पड़ाव होता है, अगर इस पड़ाव को व्यक्ति ने सही तरीके से पार कर लिया तो भविष्य में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। अगर युवावस्था में व्यक्ति गलत मार्ग पर चले गया तो फिर उसको जीवनभर पछाताना पड़ता है। आचार्य चाणक्य की नीतियों में युवावस्था के लिए कुछ बातों का उल्लेख किया गया है, अगर इन बातों का पालन किया जाए तो व्यक्ति अपने मार्ग से कभी नहीं भटक सकता है। आइए, आज जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार....

 
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बहुत महत्वपूर्ण होती है युवावस्था
  • आचार्य चाणक्य के अनुसार युवावस्था बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है। युवावास्था में व्यक्ति को ये चयन करना होता है कि उसने कैसा जीवन यापन करना है। इस उम्र में व्यक्ति को सजग और सतर्क रहना चाहिए।

 
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अच्छी संगत में रहना चाहिए
  • संगत का व्यक्ति के जीवन में बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। विशेषकर युवावस्था में एक अच्छी संगत के साथ रहना बहुत जरूरी है। अगर आपकी संगत अच्छी होगी तो आपको जीवन में सफलता अवश्य मिलेगी। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार अच्छी संगत से जीवन को नई दिशाा मिलती है और बूरी संगत से भविष्य बर्बाद हो जाता है।

 

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नशे से दूर रहें
  • युवावस्था में गलत चीजें व्यक्ति को बहुत जल्दी प्रभावित करती हैं। इस उम्र में अगर आपको गलत आदतें लग जाए तो आपको जीवन पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गलत आदतें लग आसानी से जाती हैं, परंतु इन्हें छोड़ना काफी मुश्किल होता है। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार गलत आदतें जैसा नशा करने से वर्तमान के साथ-साथ भविष्य भी बर्बाद हो जाता है।


 
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सेहत का ध्यान रखना चाहिए
  • युवावस्था का समय शरीर को तराशने का होता है, इस उम्र में आप शरीर को जैसा बनाना चाहेंगे वैसा आपका शरीर बन जाएगा। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार इस उम्र में व्यक्ति को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

 
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शिक्षा के साथ खेलकूद भी जरूरी
  • युवावस्था में शिक्षा का बहुत अधिक महत्व होता है। इस उम्र में शिक्षा के साथ ही खेलकूद में भी प्रतिभाग करना चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेलकूद भी जरूरी हैं। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार खेलकूद से मानसिक तनाव दूर होता है।
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