मूर्खाः यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसंचितम्।
दाम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्री स्वयमागता॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि जहां मूर्खों का सम्मान नहीं होता और जहां पति-पत्नी के बीच कलह नहीं होता है, वहां लक्ष्मी स्वयं आती हैं। ऐसी जगह पर हमेशा सुख-संपदा बनी रहती है।
इन जगहों पर लक्ष्मी नहीं करतीं वास
चाणक्य नीति के अनुसार जहां मूर्खों और चापलूसों का सम्मान होता है, वहां धन की देवी मां लक्ष्मी एक पल भी नहीं ठहरती हैं। मूर्ख व्यक्ति की बात पर विश्वास करने वाला हमेशा नुकसान उठाता है, इसलिए यदि लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो मूर्खों और चापलूसी करने वालों की बात पर यकीन बिल्कुल न करें, क्योंकि मूर्ख और चापलूस, दोनों तरह के व्यक्ति सही सलाह नहीं देते हैं।
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जहां भरा होता है अन्न का भंडार
अचार्य चाणक्य कहते हैं कि खूब मेहनत करके अन्न का संचय करने वाले के यहां हमेशा लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए व्यक्ति को कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
पति-पत्नी के बीच कलह
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में हमेशा पति-पत्नी के बीच कलह रहती है वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता। लक्ष्मी को प्रसन्न रखना है तो हमेशा शांति का वातावरण बनाकर रखें।