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चाणक्य नीति की इन बातों को रखेंगे याद तो करियर में कभी नहीं होंगे असफल

Tue, 28 Jul 2020 07:06 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
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चाणक्य नीति में जीवन में सफलता पाने के अचूक मंत्र दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति उन मंत्रों का सही से पालन कर ले तो वह जीवन में कभी भी असफल नहीं होगा। कुछ ऐसे ही मंत्र हम आपको बताने जा रहे हैं। चाणक्य नीति शास्त्र में एक प्रकार से सफल जीवन जीने के तरीके बताए गए हैं। आइए चाणक्य नीति के माध्यम से जानते हैं कि करियर और आर्थिक जीवन में किस तरह से सफलता प्राप्त की जा सकती है। 

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  • यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः। न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ॥ 
भावार्थ: चाणक्य नीति अनुसार जिस देश में सम्मान न हो, आजीविका न मिले, कोई भाई-बन्धु न रहता हो और जहाँ विद्या-अध्ययन सम्भव न हो, ऐसे स्थान पर नहीं रहना चाहिए। 

  • यो ध्रुवाणि परित्यज्य ह्यध्रुवं परिसेवते। ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव तत् ॥ 
भावार्थ: जो व्यक्ति निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है और अनिश्चित भी। 

आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
  • कामधेनुगुणा विद्या ह्ययकाले फलदायिनी। प्रवासे मातृसदृशा विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥ 
भावार्थ: विद्या कामधेनु के समान गुणों देने वाली मानी जाती है, जो बुरे समय में भी फल देनेवाली है, प्रवास काल में माँ के समान तथा गुप्त धन है। 

  • एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः। चतुर्भिगमन क्षेत्रं पञ्चभिर्बहुभि रणम्॥ 
भावार्थ: तप अकेले में करना उचित होता है, पढ़ने में दो, गाने मे तीन, जाते समय चार, खेत में पांच व्यक्ति तथा युद्ध में अनेक व्यक्ति होना चाहिए। 

आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
  • कः कालः कानि मित्राणि को देशः को व्ययागमोः। कस्याहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः॥ 
भावार्थ: व्यक्ति को इन चीजों के बारे में बार-बार सोचना चाहिए- कैसा समय है ? कौन मित्र है ? कैसा स्थान है ? आय-व्यय क्या है ? में किसकी और मेरी क्या शक्ति है ? 

  • आलस्योपहता विद्या परहस्तं गतं धनम्। अल्पबीजहतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्॥ 
भावार्थ: आलस्य से विद्या नष्ट होती है। दूसरे के हाथ में धन जाने से धन नष्ट हो जाता है। कम बीज से खेत और बिना सेनापति के सेना नष्ट हो जाती है। 

आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
  • तावद् भयेषु भेतव्यं यावद्भयमनागतम्। आगतं तु भयं दृष्टवा प्रहर्तव्यमशङ्कया॥ 
भावार्थ: संकटों से तभी तक डरना चाहिए जब तक वे दूर हैं, परन्तु संकट सिर पर आ जाये तो उस पर शंकारहित होकर प्रहार करना चाहिए। 
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  • वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते। मृदुना रक्ष्यते भूपः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम्॥ 
भावार्थ: धन से धर्म की, योग से विद्या की, मृदुता से राजा की तथा अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है। 
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