माता-पिता अगर अपने बच्चों की गलत आदतों को नजरअंदाज करते हैं तो ऐसे बच्चे बड़े होकर संस्कारहीन होते हैं। इसलिए आचार्य चाणक्य ने बच्चों के संस्कार पर जोर दिया है। आचार्य कौटिल्य एक महान शिक्षक थे और वे बच्चों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार के महत्व को अच्छी तरह से जानते थे। चाणक्य नीति में ऐसा कहा गया है कि माता-पिता को अपने बच्चों की इन तीन गलत आदतों को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए।
1. झूठ बोलने की आदत को न करें नजरअंदाज
चाणक्य नीति के अनुसार, अगर किसी माता-पिता के बच्चे झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे मां-बाप को तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ऐसे में बच्चों को प्यार से समझाना चाहिए। बच्चे सच बोलें इस दिशा में कार्य करना चाहिए। क्योंकि बच्चों की झूठ बोलने की आदत उन्हें आगे चलकर गलत राह में ले जा सकती है।
2. बच्चे जब न मानें आपकी बातें
बच्चों का स्वभाव चंचल और नटखट होता है। ऐसे में कई बार उन्हें सही गलत का पता नहीं होता है। मां-बाप का फर्ज है कि बच्चों को सही गलत का मतलब सिखाएं। अगर बच्चे आपकी बातें नहीं मान रहे हैं तो फिर आपको उन्हें प्यार से समझाना चाहिए और उनकी इस आदत को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
3. महापुरुषों की सुनाएं कहानियां
चाणक्य के अनुसार बच्चों को महापुरुषों की कहानियां सुनानी चाहिए। क्योंकि बच्चे कहानियों को बड़े ध्यान से सुनते हैं। ऐसे में जब बच्चे महापुरुषों की कहानियां सुनेंगे तो उनके मन में अच्छे विचार पनपेंगे। वे महापुरुषों के जीवन से प्रेरित होंगे और उनके मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे। महापुरुष उनके असली रोल मॉडल होंगे।
इस बात का रखें ध्यान
बच्चों का हृदय कोमल होता है। वे शरारती जरूर होते हैं। अगर उनमें किसी प्रकार की गलत आदत पनप रही है तो आपको उन्हें प्यार से समझाना चाहिए। डांट भी सकते हैं। लेकिन बच्चों पर कभी हाथ उठाना नहीं चाहिए।