मैं होनोलूलू में पैदा हुआ। मेसाचुसेट्स के विलियम कॉलेज से मैंने राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री ली। मैं बहुत प्रतिभाशाली छात्र नहीं था, लेकिन मुझे चीजों की समझ थी। मेरे पिता और उनके भाई वकील थे। मुझ पर इसी पारंपरिक क्षेत्र में आने का दबाव था। लेकिन यह पेशा मुझे आकर्षित नहीं करता था। मैं कोई नया और कारोबार से जुड़ा रचनात्मक काम करना चाहता था। कुछ साल बाद इंटरनेट के आने के बाद मैंने वही काम किया।
शुरुआती दो साल तक मैंने सिनसिनाटी में प्रोक्टर ऐंड गैंबल में असिस्टेंट ब्रांड मैनेजर के तौर पर काम किया। उसके बाद कुछ दिनों तक मैं पिज्जा हट में विपणन से जुड़े काम देखता रहा। 1983 में मेरे भाई ने मुझे कंट्रोल वीडियो कॉरपोरेशन के सीईओ बिल वोन मेइस्टर से परिचित कराया। वह कंपनी तब वीडियो गेम से जुड़ी एक सेवा की मार्केटिंग का काम कर रही थी, जिसके तहत उपभोक्ताओं को फोन लाइन और मॉडम से गेम डाउनलोड करने पड़ते थे। मैं वहीं मार्केटिंग कंसल्टेंट के तौर पर काम करने लगा। पर उसी साल वह कंपनी दिवालिया हो गई। फिर मैंने क्वांटम कंप्यूटर सर्विस जॉइन की, और सीईओ बन जाने पर इसका नाम बदलकर मैंने अमेरिका ऑनलाइन यानी एओएल कर दिया।
सोशल मीडिया के बढ़ते चलन को देखकर मैंने इसमें सोशल मीडिया को महत्व दिया। शुरुआत से ही एओएल ने चार्टरूम्स, इंस्टेंट मैसेजिंग और फोरम्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया। एओएल की शुरुआती सफलता की वजह यही रही। एओएल में मेरी रणनीति ऑनलाइन सेवा को किफायती तथा इस्तेमाल करने में सहज बनाना था, ताकि आम जनता के लिए यह सुलभ और उसकी पहुंच के दायरे में हो। कम्प्यूसर्विस जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तुलना में हमने शुल्क भी काफी कम रखा। इससे भी एओएल की लोकप्रियता में वृद्धि हुई। करीब एक दशक तक निरंतर कारोबारी मुनाफा कमाने के बाद एओएल का टाइम वार्नर में विलय हो गया। लेकिन यह विलय सफल नहीं हुआ, और बाद में इससे इस्तीफा देकर मैंने अपने इन्वेस्टमेंट फर्म में ध्यान देना शुरू किया। एओएल की सफलता ने मुझे सिखाया कि अगर आप कुछ नया करना चाहते हैं, तो उसके लिए नई सोच चाहिए।