मौन एक ऐसा उपाय है, जिससे आंतरिक जगत के साथ बाहरी दुनिया में भी मदद मिलती है। मौन से मन की चंचलता भी हो जाती है और वह शक्तिशाली भी बनता है। जिन्हें मोक्ष के मार्ग पर जाना हो वे इस उपाय से वह मन को नष्ट कर सकते हैं जो भरपूर जिंदगी जीना चाहते हैं वे मौन से मन की शक्ति बढ़ा सकते हैं।
बौद्ध मठ में मौन की शक्ति जानने के लिए किए प्रयोगों के दौरान करीब दो सौ लोगों को चुना गया। इनमें विद्यार्थी, साधक, कामकाजी सभी तरह के लोग थे। उनसे कहा गया कि अपने काम करते समय चुप रहना है। चुने गए लोगों में मठ से बाहर रहने वाले लोग भी थे।
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इक्कीस दिन के इस अभ्यास के बाद नोटबुक में भागीदारों के लिखे जवाब और निरीक्षक साधकों की टिप्पणियों को मिला कर देखा गया। निष्कर्ष निकला कि ध्यान दोनों तरह के काम में लगे लोगों के लिए लाभदायक हैं।
कामकाजी या लौकिक जीवन में मौन से सकारात्मक सोच का विकास होता है। इस तरह की सोच आंतरिक या मानसिक शक्ति को और मजबूत करती है। शरीर की बीमारियों से लडने की क्षमता बढ़ती है।
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लामा ने काम करते करते मौन रहने की विधि के बारे में भी लिखा है। यह अनापानसति नामक बौद्ध साधना का ही एक संस्करण है। काम करते हुए ज्यादा चुप रहने का अभ्यास करना चाहिए। बीच बीच में सांसो के आने जाने पर ही ध्यान केंद्रित करने और जो भी दिखाई या सुनाई दे रहा है, उसे बिना किसी प्रतिक्रिया के देखते रहने के लिए कहा गया है।