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क्रोध नहीं त्यागा तो हो जाएंगे बर्बाद, रामचरितमानस मे भी इसका जिक्र

Sat, 11 Apr 2020 08:18 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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क्रोध के दुष्प्रभाव जीवन में काफी होते हैं। इसकी वजह से जीवन तक बर्बाद हो सकता है। क्रोध सभी से दूर कर देता है, इसकी वजह से इंसान बिलकुल अकेला हो जाता है। जीवन निराशाओं से घिर जाता है। सबसे बडे़ हिंदू ग्रंथ में भी इस बात का जिक्र है कि कोध्र व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं है, क्रोध विनाश का कारण बनता है। आइए, आज जानते हैं तुलिसदास जी ने क्रोध को लेकर क्या कहा है.....

 
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  • तुलिसदास जी ने सबसे बड़े हिन्दू ग्रंथ रामचरितमानस में भी क्रोध को लेकर लिखा है 
क्रुद्धः पापं न कुर्यात् कः क्रृद्धो हन्यात् गुरूनपि ।
क्रुद्धः परुषया वाचा नरः साधूनधिक्षिपेत् ॥
कः क्रुद्धः पापं न कुर्यात्, क्रृद्धः गुरून् अपि हन्यात्, क्रुद्धः नरः परुषया वाचा साधून् अधिक्षिपेत् ।
 
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क्रोध करने वाला व्यक्ति पापकर्म अधिक करता है
  • तुलसीदास जी ने कहा है कि क्रोध करने वाला व्यक्ति पापकर्म अधिक करता है। पुण्य के कार्यों से वो काफी दूर रहता है।क्रोध में व्यक्ति बड़े एवं पूज्य जनों तक को मार डालता है। ऐसा व्यक्ति अशब्दों का उपयोग अधिक करता है और साधुजनों पर भी निराधार आक्षेप लगाता हैं।
 
 

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 क्रोध करने से आपके स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान होता है
  • अगर आपने अपने क्रोध पर काबू नहीं पाया तो ये आपको बर्बाद कर देगा। क्रोध करने से आपके स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान होता है। विज्ञान के अनुसार अधिक क्रोध करने से ब्लड प्रेशर काफी हद तक बढ़ जाता है।क्रोध करने से आपको मानसिक परेशानियां भी हो सकती है।

 
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क्रोध के कारण जीवन अस्त- व्यस्त हो जाता है
  • क्रोध आपके जीवन को अस्त व्यस्त कर देगा। इसकी वजह से आपके रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है और जिंदगी में बहुत कुछ खो देते है। गुस्से में बोला गया हर एक शब्द जहरीला होता है। जिसकी वजह से आपकी जिंदगी की हर प्यारी बातें, अच्छा व्यवहार पल भर खत्म हो जाता है।
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