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इस सोमवार पीपल की पूजा करने का है बड़ा ही लाभ

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पीपल वृक्ष के विषय में मान्यता है कि शनिवार के अलावा अन्य दिनों में पीपल का स्पर्श करना शुभ नहीं होता है। लेकिन 23 जून को सोमवार के दिन कुछ ऐसा योग बना है जिसमें पीपल की पूजा करने से दोष नहीं बल्कि बड़ा लाभ मिलने वाला है।
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पीपल पूजा का महत्व आखिर क्यों?

इस दिन पीपल की पूजा का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इस दिन योगिनी एकादशी व्रत है। पुराणों में बताया गया है कि इस दिन पीपल की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

इस व्रत के विषय में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्घा पूर्वक नियम निष्ठा से यह व्रत रखता है उसे 88 हजार ब्रह्मणों को भोजन करवाने का पुण्य प्राप्त है। यानी व्यक्त मुक्ति पाने का अधिकारी बन जाता है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

स्वर्ग में अलकापुरी नगरी है। यहां के राजा कुबेर हैं। ‘हेममाली’ नाम का एक यक्ष कुबेर की सेवा में था। इसका काम प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के लिए फूल लाकर देना था। एक बार कुबेर भगवान शिव की पूजा में बैठे थे लेकिन दोपहर बीत जाने के बाद भी हेममाली फूल लेकर नहीं आया। इससे कुबेर नाराज हुए और अपने सेवकों से पूछा कि हेममाली फूल लेकर क्यों नहीं आया है।

इस पर सेवकों ने कहा कि वह कामाशक्त होकर पत्नी के संग विहार कर रहा है। इससे कुबेर कुपित हो उठे और हेममाली को श्राप दिया कि तुम मृत्यु लोक में चले जाओ। शिव की अवहेलना करने के कारण तुम्हें कुष्ठ रोग हो जाए। हेममाली तुरंत स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आ गया।

कष्टपूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए हेममाली एक दिन ऋषि मार्कण्डेय जी के पास पहुंचा। ऋषि ने हेममाली को योगिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। इस व्रत से हेममाली का कुष्ठ रोग समाप्त हो गया और पाप से मुक्त होकर स्वर्ग में स्थान प्राप्त कर लिया।
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योगिनी एकादशी व्रत विधि

इस दिन शरीर पर मिट्टी अथवा तिल लगाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद एक घड़े में जल भरकर उसके ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर पूजा करें।

एकादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। दिन भर सात्विक दिनचर्या बनाए। जितना अधिक संभव हो 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना चाहिए।
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