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सावन महीने में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां?

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सावन का महीना आते ही चूड़ियों की बिक्री बढ़ जाती है। खासतौर पर हरे रंग की चूड़ियों की मांग सबसे ज्यादा रहती है। यही वजह है कि चूड़ी बेचने वाले इन दिनों हरी चूड़ियों की कीमत बढ़ा देते हैं।
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लेकिन महिलाओं को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें तो सिर्फ हरी चूड़ियों से मतलब होता है। क्या आपने सोचा है कि इसका कारण क्या है?

प्रकृति से है हरी चूड़ियों का संबंध

ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बातती हैं कि सावन का महीना प्रकृति के सौन्दर्य का महीना होता है। शास्त्रों में महिलाओं को भी प्रकृति का रूप माना गया है।

इस मौसम में बारसात की बूंदों प्रकृति खिल उठती है हर तरफ हरियाली छा जाती है। ऐसे में प्रकृति से एकाकार होने के लिए महिलाएं भी मेंहदी लगाती हैं। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनती हैं।

हरी चूड़ियां धारण करने का सबसे बड़ा कारण है यह

सावन के महीने में सुहागन स्त्रियों के लिए कई त्योहार आते हैं जिनमें कज्जली तीज, हरियाली तीज शामिल हैं। इन त्योहारों में हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां और मेंहदी लगाने के नियम हैं।

इसका कारण यह है कि सावन के महीने में हरे रंग का वस्त्र धारण करने से सौभाग्य में वृद्घि होती है और पति-पत्नी के बीच स्नेह बढ़ता है।

हरी चूड़ियों का संबंध प्रजनन क्षमता से

हरा रंग उर्वरा का प्रतीक माना जाता है। सावन के महीने में प्रकृति में हुए बदलाव से हार्मोन्स में भी बदलाव होते हैं जिसका प्रभाव शरीर और मन पर पड़ता जो स्त्री पुरुषों में काम भावना को बढ़ाता है।

जबकि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हरा रंग बुध से प्रभावित होता है। बुध एक नपुंसक ग्रह है। इसलिए बुध से प्रभावित होने के कारण हरा रंग काम भावना को नियंत्रित करने का काम करता है। सावन में मेंहदी लगाने का वैज्ञानिक कारण भी यही माना जाता है।
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हरी चूड़ियों का स्वास्थ्य से संबंध

सावन के महीने में कई प्रकार की बीमारियां फैलने लगती हैं। आयुर्वेद में हरा रंग कई रोगों में कारगर माना गया है। यही कारण है कि सावन में महीलाएं स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मेंहदी लगाती हैं और हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं।
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