पौराणिक मान्यताओं में शमी का वृक्ष बड़ा ही मंगलकारी माना गया है।
- फोटो : अमर उजाला
Importance And Significance Of Shami Plant In Puja : सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। विशेष रूप से यदि इस दिन पूरी आस्था से उनकी पूजा की जाए तो वह शिवभक्तों की पुकार जरूर सुनते हैं। भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के दिन बहुत सारी अलग-अलग चीजे जैसे-बिल्बपत्र, पुष्प, धतूरा, भांग आदि अर्पित करते हैं। शिवपुराण के अनुसार यदि शमी के वृक्ष के पत्तों को भी शिव पूजा में सम्मलित किया जाए तो भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाए शीघ्र पूरी करते हैं और उनके भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
क्या है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं में शमी का वृक्ष बड़ा ही मंगलकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्री राम लंका से विजय प्राप्त करके आए थे तो उन्होंने भी शमी के वृक्ष का पूजन किया था। मान्यता यह भी है कि महाभारत के समय में जब पांडवों को अज्ञातवास दिया गया, तब उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। नवरात्रि में भी मां दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। भोलेनाथ के साथ-साथ गणेश जी और शनिदेव, दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है।
ऐसे चढ़ाएं शमीपत्र
सोमवार को स्न्नान करके शिव मंदिर में जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके तांबे के पात्र में गंगाजल सफेद चंदन,चावल आदि मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें। अभिषेक करते समय 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का उच्चारण करें। जब अभिषेक कर लें, तब शिव जी को बिल्व पत्र, सफेद वस्त्र, जनेऊ, चावल, प्रसाद के साथ शमी के पत्ते भी अर्पित करें। शमी के पत्ते अर्पित करते समय हो सके तो इस मंत्र का उच्चारण करें।
अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
शमी पत्र अर्पित करने के उपरांत शिवजी की धूप, दीप और कर्पूर से आरती करें।
इस दिशा में लगाएं शमी का पौधा
ऐसी मान्यता है कि घर में शमी का पेड़ लगाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही यह वृक्ष शनि के कोप से भी बचाता है। शमी का वृक्ष घर की उत्तर दिशा या ईशान कोण में लगाना लाभकारी माना गया है,लेकिन इस दिशा में इसे गमले में लगाना चाहिए।जमीन में लगा रहे हैं तो दक्षिण दिशा में लगा सकते हैं। ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि नियमित रूप से शमी वृक्ष की पूजा की जाए और इसके नीचे सरसों तेल का दीपक जलाया जाए, तो घर पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है और शनिजन्य दोष से मुक्ति मिलती है।