हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में अंतिम संस्कार है दाह संस्कार। इस संस्कार में धरती पर अपने जीवन काल को पूरा करने लेने के बाद जब व्यक्ति की आत्मा शरीर को त्यागकर वापस अन्य शरीर में प्रवेश के लिए चली जाती है तब मृत शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है।
अंतिम संस्कार में वेद मंत्रों के साथ शव को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि अग्नि में भष्म होने के बाद शरीर जिन पंच तत्वों से बना है उन पंच तत्वों में जाकर वापस मिल जाता है।
लेकिन आत्मा को अग्नि जला नहीं सकती है इसिलए आत्मा का अस्तित्व देह के जल जाने के बाद भी मौजूद होता है और वह मृत्यु से लेकर मृतक संस्कार तक के सारे कर्मों को खुद अपनी आंखों से देखता है।
कुछ व्यक्तियों की आत्मा शरीर का त्याग करने के बाद इस धरती से अपने कर्मों का फल भोगने चली जाती है लेकिन कुछ व्यक्तियों की आत्मा इसी धरती पर भटकती रहती है।