भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त सामान्य जल से लेकर गंगाजल और मधु मिश्रित जल तक अर्पित करते हैं। कुछ ऐसे भक्त भी आपके मिल जाएंगे जो शिव जी का दूध से अभिषेक करते हैं। लेकिन क्या दूध से शिव जी प्रसन्न होते हैं?
शिव का अभिषेक किन वस्तुओं से करें
शिव पुराण में बताया गया है कि भगवान भोलेनाथ को किन-किन वस्तुओं का अभिषेक प्रिय है। अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक का फल भी अलग होता है।
जल अर्पित करने से वर्षा की प्राप्ति होती है, कुश जल से शांति मिलती है। गन्ने के रस से लक्ष्मी, मधु व घी से धन की प्राप्ति होती है।
दूध से संतान सुख मिलता है। जल की धारा और बेलपत्र से मन की शांति, एक हजार मंत्रों सहित घी की धारा से वंश वृद्धि होती है। सरसों और तिल चढ़ाने से शत्रु नाश एवं रोगों से मुक्ति मिलती है।
इसलिए जिन जिन लोगों को संतान सुख की कामना हो उन्हें ही दूध से शिव का अभिषेक करना चाहिए। लेकिन दूध को शिव का प्रिय क्यों माना गया है इस विषय में एक गहरा रहस्य है।
शिव का दूध से अभिषेक, क्या है रहस्य?
दूध भगवान शिव का प्रिय होने का एक बड़ा कारण यह है कि इसकी तासीर ठंडी होती है। भगवान शिव ने जब हलाहल विष पीया था। उस समय से ही गर्म वस्तुओं की बजाय शिव जी को शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुएं प्रिय हो गई।
कारण यह है कि यह विष की उष्णता को कम करता है। यही कारण है कि शिव जी का जलाभिषेक भी होता है।
सावन में दूध से अभिषेक महत्व क्यों?
यूं तो अपनी श्रद्घा के अनुसार आप कभी भी दूध से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं लेकिन सावन के महीने में दूध से अभिषेक का ज्यादा महत्व है। इसका धार्मिक कारण की अपेक्षा वैज्ञानिक कारण अधिक महत्वपूर्ण है।
विज्ञान के अनुसार सावन के महीने में शरीर में वात तत्व की मात्रा बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। इन दिनों हरी पत्तियों और घास में भी वात तत्व बढ़ जाता है। इन्हें पशु खाते हैं, इससे इनके दूध का सेवन करने से शरीर में वात तत्व की मात्रा बढ़ने की संभावना अधिक रहती है।
इसलिए साधु महात्माओं ने जो प्राचीन काल में शोध अनुसंधान भी किया करते थे यह नियम बनाया कि सावन में शिव जी का दूध से अभिषेक किया जाए। ताकि मनुष्य दूध के सेवन से बचे और स्वस्थ रहे।