जब भी आप घर में कोई विशेष पूजा का आयोजन
अथवा शुभ कार्य का अनुष्ठान करते हैं तो उसमें नारियल जरूर होता है। पण्डित जी की
खास हिदायत होती है कि एक पानी वाला नारियल पूजा में जरूर रखें। इसका कारण यह है कि
कोई भी पूजा और अनुष्ठान बिना गणेश और लक्ष्मी के आशीर्वाद के बिना संपन्न नहीं हो
सकता। गणेश की मौजूदगी के लिए पूजा में सुपारी रखा जाता है तो लक्ष्मी की कृपा के
लिए नरियल। ऐसी मान्यता है कि पूजा में नारियल और सुपारी रखने से बिना किसी विघ्न
के कार्य संपन्न होता है।
ज्योतिषशास्त्र में नारियल पूजनीय
नारियल ऊपर
से सख्त आवरण से ढका होता है। इसलिए बाहरी प्रदूषण का इस पर असर नहीं होता है। यह
अंदर से निर्मल और पवित्र रहता है। इसके अंदर जल भरा होता है। ज्योतिषशास्त्र के
अनुसार सफेद और जल वाले स्थान पर चन्द्रमा का वास रहता है। चन्द्रमा मन का कारक
ग्रह है। किसी कार्य में सफलता के लिए मन का शांत होना जरूरी है। वास्तुशास्त्र के
अनुसार जलीय जीवों एवं जल युक्त वस्तुओं से वास्तु दोष दूर होता है। इन कारणों से
शुभ कार्यों में नारियल कलश पर रखकर इसकी पूजा की जाती है।
नारियल में मौजूद
औषधीय गुण
जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है स्वास्थ्य। नारियल को पूजा में शामिल
करने का एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि नारियल में स्वास्थ्य से संबंधित कई
समस्यओं को दूर करने की क्षमता है। हमारे ऋषि मुनियों ने इसी तथ्य को समझाने के लिए
नारियल को पूजानीय फल के रूप में प्रतिष्ठित किया होगा।
नारियल में दूध से
अधिक पौष्टिक तत्व मौजूद हैं। बच्चे को दूध नहीं पच रहा हो तो नारियल का पानी दिया
जा सकता है। यह सुपाच्य होता है। इसके नियमित सेवन से रूप निखरता है तथा मन निर्मल
होता है। झाईयां एवं चेचक के दाग मिटाने में इसका पानी बहुत ही कारगर होता है। इसका
उपयोग मिठाइयां बनाने में तथा विभन्न प्रकार के व्यंजनों में भी होता है। अपने इन
गुणों के कारण भी नारियल पूजनीय है।