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Christmas Day 2024: क्या है क्रिसमस ट्री सजाने का इतिहास? जानें इससे जुड़ी बच्चे की कुर्बानी की कहानी

Mon, 09 Dec 2024 07:49 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हर साल 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस का पर्व मनाया जाता है। क्रिसमस के त्योहार पर प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिन प्रेम व सद्भाव के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग केक काटकर क्रिसमस का आनंद उठाते हैं और एक दूसरे को उपहार भी देते हैं।
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क्रिसमस ट्री - फोटो : Amar Ujala
Christmas Day 2024: क्रिसमस का त्योहार, जो 25 दिसंबर को मनाया जाता है, प्रेम और सद्भाव का एक प्रतीक है। यह दिन ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, समय के साथ यह त्योहार सभी धर्मों और वर्गों के लोगों द्वारा मनाया जाने लगा है। क्रिसमस के जश्न में केक, उपहारों के साथ-साथ क्रिसमस ट्री का विशेष महत्व है। क्रिसमस ट्री को सदाबहार पेड़ों से बनाया जाता है और इसे रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट से सजाया जाता है। यह पेड़ जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत जर्मनी से हुई थी। क्रिसमस ट्री के आसपास परिवार और दोस्त एकत्रित होते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि क्रिसमस ट्री को इतना महत्व क्यों दिया जाता है? आइए इस लेख में क्रिसमस ट्री के रोचक इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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क्रिसमस ट्री - फोटो : Adobe Stock
क्रिसमस ट्री का इतिहास
क्रिसमस ट्री की शुरुआत के पीछे कई किवदंतियां प्रचलित हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध किंवदंती 16वीं सदी के ईसाई धर्म सुधारक मार्टिन लूथर से जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार जब मार्टिन लूथर एक बर्फीले जंगल से गुजर रहे थे, तो उन्होंने एक सदाबहार पेड़ को देखा जिसकी डालियां चांदनी में चमक रही थीं।
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क्रिसमस ट्री - फोटो : Adobe Stock
इस दृश्य से प्रेरित होकर उन्होंने अपने घर में भी एक सदाबहार पेड़ लगाया और उस पर मोमबत्तियां लगा दीं। धीरे-धीरे इस पेड़ को ईसा मसीह के जन्मदिन के अवसर पर सजाने की परंपरा शुरू हो गई और यही क्रिसमस ट्री के रूप में विकसित हुआ।

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क्रिसमस ट्री - फोटो : Adobe Stock
क्रिसमस ट्री से जुड़ी बच्चे की कुर्बानी की कहानी
क्रिसमस ट्री की शुरुआत के बारे में कई किवदंतियां प्रचलित हैं। एक ऐसी ही कहानी 8वीं सदी की है। एक बार जर्मनी के सेंट बोनिफेस को पता चला कि कुछ लोग एक विशाल ओक ट्री के नीचे एक बच्चे की कुर्बानी देंगे। इस बात की जानकारी मिलते ही सेंट बोनिफेस ने बच्चे को बचाने के लिए ओक ट्री को काट दिया।
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क्रिसमस ट्री - फोटो : Adobe Stock
इसके बाद उसी ओक ट्री की जड़ के पास से एक फर ट्री या सनोबर का पेड़ उग गया। सेंट बोनिफेस ने इस पेड़ को ईश्वरीय चमत्कार बताया और लोगों को समझाया कि यह पेड़ स्वर्ग का प्रतीक है। तब से लोग इस पेड़ को ईसा मसीह के जन्मदिन पर सजाने लगे और धीरे-धीरे यह परंपरा पूरी दुनिया में फैल गई।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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