फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐसे पाएं श्राद्ध पक्ष में दान से उत्तम फल

Wed, 03 Oct 2012 02:44 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन के अलावा दान का भी बड़ा भारी महत्व है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त किये गये दान का उत्तम फल प्राप्त होता है। कालसर्प दोष एवं पितृ दोष भी इस समय किये गये दान से दूर होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति की जैसी श्रद्धा और सामर्थ हो उसी अनुरूप श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त दान करना चाहिए। आइए जानें शास्त्रों के मुताबिक इस समय के लिए सबसे उत्तम दान किन्हें माना गया है।
विज्ञापन


गौ दान
शास्त्रों में गौ दान को उत्तम दान कहा गया है। गरूड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय जो व्यक्ति गाय की पूंछ पकड़कर गाय का दान करते हैं उसे मृत्यु के बाद वैतरणी नदी पार करने में आसानी होती है। वैतरणी नदी यमलोक के रास्ते में है। इस नदी में भयानक जीव-जन्तु हैं जो पापी व्यक्ति को पीड़ित करते हैं। पितृ पक्ष में गाय का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख एवं एश्वर्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

काले तिल का दान
काला तिल भगवान विष्णु को प्रिय है। श्राद्ध के हर कर्म में तिल की आवश्यकता होती है। श्राद्ध पक्ष में दान करने वाले को कुछ भी दान करते समय हाथ में काला तिल लेकर दान करना चाहिए। इससे दान का फल पितरों को प्राप्त होता है। अगर कुछ अन्य वस्तु दान नहीं कर रहे हैं तो सिर्फ तिल का दान भी किया जा सकता है। तिल का दान करने से पितर गण संकट एवं विपदाओं से रक्षा करते है।
विज्ञापन


भूमि दान
शास्त्रों में भूमि दान को सर्वोत्तम दान में से एक कहा गया है। महाभारत में कहा गया है कि भूलवश बड़े से बड़ा पाप हो जाने पर भूमि दान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है। भूमि दान से अक्षय पुण्य मिलता है। मान्यता है कि पितरों के निमित्त भूमि दान करने से पितरों को पितर लोक में रहने के लिए अच्छा स्थान मिलता है।

जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं उन्हें पितृ पक्ष में भूमि का दान करना चाहिए। जिनके लिए भूमि दान करना संभव नहीं हो वह भूमि के स्थान पर मिट्टी का दान भी कर सकते हैं। श्रद्धापूर्वक मिट्टी का दान करने से भी पितर संतुष्ट हो जाते हैं। भूमि दान से यश, मान-सम्मान एवं स्थायी संपत्ति में वृद्धि होती है। 

चांदी का दान
पुराणों के अनुसार पितरों का निवास चन्द्र के ऊपरी भाग में है। शास्त्रों के अनुसार पितरों को चांदी वस्तुएं प्रिय हैं। चांदी, चावल, दूध से पितर खुश होते हैं। पितरों की प्रसन्नता हेतु इन वस्तुओं का दान किया जा सकता है। इन वस्तुओं के दान से वंश की वृद्धि होती है एवं मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

वस्त्रों का दान
गरूड़ पुराण एवं कई शास्त्रों में बताया गया है कि पितरों को भी हमारी तरह सर्दी, गर्मी का एहसास होता है। मौसम के प्रभाव से बचने हेतु पितरगण अपने वंशजों एवं पुत्रों से वस्त्र की इच्छा रखते हैं। जो व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त वस्त्र दान करते हैं उन पर सदैव पितरों की कृपा बनी रहती है। पितरों को धोती एवं दुपट्टा का दान करना उत्तम माना गया है। वस्त्र दान से यमदूतों का भय समाप्त हो जाता है।

गुड़ एवं नमक का दान
जिन लोगों के घर में अक्सर कलह एवं आर्थिक परेशानी बनी रहती है उन्हें पितरों के निमित्त गुड़ एवं नमक का दान करना चाहिए। गरूड़ पुराण के अनुसार नमक के दान से यम का भय दूर होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें