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विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मिलते हैं अनेकों लाभ, जानिए पाठ का महत्व और करने के नियम

Mon, 06 Jan 2025 10:20 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

विष्णु सहस्रनाम का पाठ न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि इसे करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है।विष्णु सहस्रनाम का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।
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शास्त्रों के अनुसार, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्राप्त होती है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के एक हजार नामों का संग्रह है, जिसे महाभारत के शांति पर्व में भी उल्लेखित किया गया है। इसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि इसे करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है।विष्णु सहस्रनाम का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। जब पितामह भीष्म शरशैया पर लेटे हुए थे, तब उन्होंने युधिष्ठिर को विष्णु सहस्रनाम का महत्व समझाया। यह पाठ न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके माध्यम से आत्मा और परमात्मा का मिलन भी संभव है। यह पाठ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी उपाय है।

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विष्णु सहस्रनाम का महत्व
कर्मों का शुद्धिकरण- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। इसे नित्य पाठ करने से विचार और कर्म दोनों शुद्ध होते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार- इस पाठ से मानसिक तनाव और नकारात्मकता दूर होती है। घर में इसे करने से वातावरण में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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आरोग्य और दीर्घायु- शास्त्रों के अनुसार, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्राप्त होती है। यह शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक है।
धन और समृद्धि का आगमन- भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता माना गया है। उनकी कृपा से जीवन में धन, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
मोक्ष की प्राप्ति- जो व्यक्ति विष्णु सहस्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसे जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। यह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

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विष्णु सहस्रनाम पाठ करने के नियम

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शास्त्रों में विष्णु सहस्रनाम पाठ के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से पाठ का प्रभाव अधिक होता है।
पवित्रता का ध्यान रखें- पाठ करने से पहले स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन और शरीर दोनों की पवित्रता आवश्यक है।
सही समय और स्थान का चयन- प्रातःकाल का समय पाठ के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसे शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर करें। यदि संभव हो तो विष्णु जी की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर पाठ करें।
संकल्प एवं शुद्ध उच्चारण- पाठ शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपने मन में एक संकल्प लें। पाठ करते समय मंत्रों का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए। अशुद्ध उच्चारण से लाभ में कमी हो सकती है।

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आसन का प्रयोग
पाठ करते समय आसन का ध्यान रखें। कुश या ऊन का आसन श्रेष्ठ माना गया है। यह ऊर्जा को स्थिर रखने में मदद करता है।
भोग और आरती
पाठ समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें और आरती करें। इससे पाठ पूर्ण होता है।
नियमितता रखें
विष्णु सहस्रनाम का पाठ नियमित रूप से करना चाहिए। विशेष रूप से एकादशी, पूर्णिमा और गुरुवार को पाठ करने से विशेष फल मिलता है।

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