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आप भी करें, श्री राम ने खास काम के लिए किया था यह व्रत

Mon, 24 Feb 2014 07:40 PM IST
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली
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भगवान राम जब रावण से युद्घ के लिए वानरों को लंका ले जाने की तैयारी कर रहे थे। उस समय सबसे बड़ी समस्या सामने आई की सेना को लेकर सागर पार कैसे किया जाएगा।
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इस उलझन में भगवान राम और लक्ष्मण बकदाल्भ्य मुनि के पास पहुंचे। मुनि ने भगवान राम का स्वागत किया और आने का प्रयोजन पूछा। राम ने कहा कि, हमें सेना सहित समुद्र पार करना है, इसके लिए कोई उपाय बताएं।

बकदाल्भ्य मुनि ने राम को विजया एकादशी करने का सुझाव दिया। शास्त्रों में फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा गया है। इस वर्ष यह एकादशी 25 फरवरी को है।
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विजया एकादशी व्रत की विधि बताते हुए मुनी ने कहा कि दशमी के दिन सोने, चांदी, तांबा अथवा मिट्टी का एक कलश स्थापित करके उस कलश को जल से भरें और उसमें पल्लव डालें।

इसके ऊपर भगवान विष्णु का सोने का एक विग्रह स्थापित करें। एकादशी के दिन प्रात: काल स्नान करें। माला, चन्दन, सुपारी तथा नारियल आदि के द्वारा कलश की पूजा करें।

एकादशी के दिन कलश के सामने भगवान की कथाओं का पाठ करें और रात में जागरण करके भजन कीर्तन करें। अगले दिन कलश को जल में प्रवाहित कर दें और कलश पर रखा सामान ब्रह्मण को दान कर दें।

भगवान राम ने इसी विधि से विजया एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से समुद्र पर सेतु निर्माण का कार्य सफल हुआ और राम सेना समेत लंका पहुंचकर रावण पर विजय प्राप्त करने में सफल हुए।

विजया एकादशी का पुण्य
पद्पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है उसे वाजपेय यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि इस व्रत से कठिन समस्याओं पर भी विजय प्राप्त किया जा सकता है।
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