महाभारत की कथा के महत्वपूर्ण पात्र विदुर कौरव-वंश की गाथा में अपना विशेष स्थान रखते हैं। और विदुर नीति जीवन-युद्ध की नीति ही नहीं, जीवन-प्रेम, जीवन-व्यवहार की नीति के रूप में अपना विशेष स्थान रखती है। राज्य-व्यवस्था, व्यवहार और दिशा निर्देशक सिद्धांत वाक्यों को विस्तार से प्रस्तावना करने वाली नीतियों में जहां चाणक्य नीति का नामोल्लेख होता है, वहां सत्य-असत्य का स्पष्ट निर्देश और विवेचन की दृष्टि से विदुर-नीति का विशेष महत्व है। व्यक्ति वैयक्तिक अपेक्षाओं से जुड़कर अनेक बार नितान्त व्यक्तिगत, एकेंद्रीय और स्वार्थी हो जाता है, वहीं वह वैक्तिक अपेक्षाओं के दायरे से बाहर आकर एक को अनेक के साथ तोड़कर, सत्य-असत्य का विचार करते हुए समष्टिगत भाव से समाज केंद्रीय या बहुकेंद्रीय होकर परार्थी हो जाता है। विदुर नीति के अनुसार मनुष्य यदि जीवन में सफल होना चाहता है तो उसे अपनी इन तीन आदतों को बदलना होगा। आइए जानते हैं क्या है वो तीन आदतें-
क्रोध: विदुर नीति के अनुसार क्रोध मनुष्य का सबसे बाद शत्रु है, मनुष्य को समझ नहीं आता है कि वह क्रोध में क्या करने जा रहा है और अंत में उसके हाथ सिवा पछतावे के कुछ नहीं लगता। इसिलए अगर आप सफल और सुखी जीवन की कामना करते हैं तो क्रोध का त्याग करें।
लालच: विदुर नीति के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में लालच रहता है वह कभी सुखी नहीं होता। अक्सर मनुष्य लालच में कुछ ऐसा कर बैठता है कि जीवन भर उसकी ज़िंदगी में अस्थिरता आ जाती है। इसलिए लालच को तुरंत त्याग देना चाहिए।
घमंड: विदुर नीति में
महात्मा विदुर कहते हैं कि मनुष्य को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। दरअसल घमंड से मनुष्य का सही वयक्तित्व नजर नहीं आता और उसके अच्छे कर्मों पर पानी फेर देता है। मनुष्य कितना भी ऊंचा क्यों न उठ जाए उसे घमंड नहीं करना चाहिए। ऐसे लोग घमंड में आकर अक्सर खुद की हानि कर बैठते हैं।