‘नमस्ते रुद्ररुपिण्यै नमस्ते मधु मर्दिनी/नम: कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनी/नमस्ते शुंभहंत्रयै च निशुंभासुरघातिनी/जाग्रतं हि महा देवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे...।’ रौद्र रूप धारण कर मधु-कैटभ जैसे राक्षसों के दंभ को चूर करने और उनका नाश करने वाली महिषासुर मर्दिनी का ध्यान करने से सर्वसिद्धि प्राप्त हो जाती है।
वासंतिक नवरात्र में जगत प्रतिपालिका की नौ दिवसीय आराधना 29 मार्च से आरंभ होगी। उस दिन शाम 6:29 बजे तक ही प्रतिपदा का मान्य है। इसके बाद द्वितीया तिथि क्षयवती है। ऐसे में दोनों तिथियों का मान बुधवार को होगा।
बाजार में नारियल, चुनरी के साथ ही कलशों की बिक्री शुरू हो गई है। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद अभी मंदिरों में साफ-सफाई शुरू न होने से लोगों में नाराजगी है। इस बार नव संवत्सर का राजा बुध और मंत्री गुरु है। ऐसे में बुधवार से शुरू हो रहा वासंतिक नवरात्र अत्यंत शुभ फलदायी होगा।
कल स्थापन कर मां की नौ दिन आराधना से सुख, समृद्धि और मनचाही इच्छाओं की प्राप्ति हो सकती है। सनातनधर्मी परिवारों में कलश स्थापन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों की सफाई कराने के साथ ही घट स्थापना के लिए पुरोहितों की बुकिंग की जा रही है।