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वासंतिक नवरात्र 29 मार्च से, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

Fri, 24 Mar 2017 05:38 PM IST
amarujala.com, presented by शैलेश कुमार शुक्ल
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दुर्गा पूजा
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‘नमस्ते रुद्ररुपिण्यै नमस्ते मधु मर्दिनी/नम: कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनी/नमस्ते शुंभहंत्रयै च निशुंभासुरघातिनी/जाग्रतं हि महा देवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे...।’ रौद्र रूप धारण कर मधु-कैटभ जैसे राक्षसों के दंभ को चूर करने और उनका नाश करने वाली महिषासुर मर्दिनी का ध्यान करने से सर्वसिद्धि प्राप्त हो जाती है।
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वासंतिक नवरात्र में जगत प्रतिपालिका की नौ दिवसीय आराधना 29 मार्च से आरंभ होगी। उस दिन शाम 6:29 बजे तक ही प्रतिपदा का मान्य है। इसके बाद द्वितीया तिथि क्षयवती है। ऐसे में दोनों तिथियों का मान बुधवार को होगा।

बाजार में नारियल, चुनरी के साथ ही कलशों की बिक्री शुरू हो गई है। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद अभी मंदिरों में साफ-सफाई शुरू न होने से लोगों में नाराजगी है। इस बार नव संवत्सर का राजा बुध और मंत्री गुरु है। ऐसे में बुधवार से शुरू हो रहा वासंतिक नवरात्र अत्यंत शुभ फलदायी होगा।
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कल स्थापन कर मां की नौ दिन आराधना से सुख, समृद्धि और मनचाही इच्छाओं की प्राप्ति हो सकती है। सनातनधर्मी परिवारों में कलश स्थापन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों की सफाई कराने के साथ ही घट स्थापना के लिए पुरोहितों की बुकिंग की जा रही है।

 
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नवरात्र के प्रथम दिन दो गौरी दरबारों में लगेगी कतार

दुर्गा पूजा
बुधवार की सुबह 6:32 बजे कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त है। वासंतिक नवरात्र में काशी में नौ दुर्गा के दरबारों में रेला उमड़ेगा ही, नौ गौरी की झांकियों के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगेगी।

गायघाट पर मुखनिर्मालिका गौरी और काशीपुरा स्थित भूत भैरव गली में ज्येष्ठा गौरी के मंदिर हैं। नवरात्र के पहले दिन इस दोनों गौरी दरबारों में आस्थावानों की कतार लगेगी।

कलश स्थापन का मुहूर्त
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29 मार्च, प्रात:काल 6:32 बजे
अभिजीत मुहूर्त: दिन के 11:35 से 12:23 तक
06 बजे शाम से चैती चांद की मान्यता


इस बार वासंतिक नवरात्र में द्वितीया तिथि क्षयवती है। इसलिए प्रतिपदा और द्वितीया दोनों का मान 29 मार्च को होगा। काशी में नौ गौरी के स्वरूपों में मुख निर्मालिका और ज्येष्ठा गौरी का दर्शन उसी दिन होगा।
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