25 अप्रैल को वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। शास्त्रों में इस एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा गया है। इस एकादशी के व्रत के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत का विधिवत पालन करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुराणों में इस एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदायिनी प्रदान करने वाली कहा गया है। पुराणों में इस व्रत की ऐसी महिमा बतायी गयी है कि जो भी यह व्रत रखकर भगवान मधुसूदन की पूजा करता है उसके सारे पाप और ताप दूर हो जाते हैं। व्रत के पुण्य से व्यक्ति को स्वर्ग अथवा अन्य उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है।
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ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने का जो पुण्य है वह एक मात्र वरूथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।
वरुथिनी एकादशी व्रत का नियम
इस व्रत का नियम है कि व्रत रखने वाले को काम, क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। असत्य बोली एवं दूसरों की निंदा से बचना चाहिए। व्रती के लिए पान, सुपारी एवं तैलीय पदार्थ का सेवन करना वर्जित है।
सट्टा एवं निद्रा का भी त्याग करना चाहिए। रात्रि जागरण करते हुए भगवान के नाम और उनके अवतारों की कथा और कीर्तन करें। द्वादशी के दिन भी लहसुन, प्याज, बैंगन, मांसाहार और मादक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।
वरूथिनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा राज किया करते थे। राजा बड़े ही उदार धार्मिक विचारों वाले थे। एक बार जब राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इससे घबराया नहीं और अपनी तपस्या में लीन रहा।
कुछ देर बाद पैर चबाते-चबाते भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। अब राजा घबराया लेकिन तपस्या और धर्म के कारण क्रोध और हिंसा न करके राजा भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा। राजा की पुकार सुनकर भक्तवत्सल भगवान श्री विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला।
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राजा का पैर भालू खा चुका था। इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुए। उसे दुःखी देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे।
इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।