हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान वामन देव का अवतार हुआ था।
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Vaman Dwadashi 2022 : आज बुधवार, 7 सितंबर को वामन जन्मोत्सव का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान वामन देव का अवतार हुआ था। वामन देव भगवान विष्णु के अवतार थे इसलिए इस तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। भगवान वामन का जन्म भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि पर दोपहर अभिजीत मुहूर्त में हुआ था इसी कारण से इनका जन्मोत्सव दोपहर के समय विधि -विधान के साथ किया जाता है।
वामन देव कथा
- सतयुग में दैत्यराज बलि हुए थे जो विष्णु भक्त भगवान प्रह्रलाद के पौत्र थे। राजा बलि ने अपने पराक्रम और बल से स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था जिस कारण से सभी देवी-देवताओं में हडकंप मच गया था। तब राजा बलि से रक्षा के लिए सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने सभी देवी-देवताओं की रक्षा का वचन देते हुए कहा कि मैं देवमाता अदिति के यहां वामन देव के रूप में जन्म लूंगा।
- एक बार की बात है राजा बलि नर्मदा नदीर के किनारे यज्ञ कर रहे थे। तब भगवान विष्णु वामन रूप में यज्ञ स्थल पर पहुंचे। वामनदेव को ब्राह्राण में देखकर राजा बलि ने उनका आदर-सत्कार और स्वागत किया और दान में कुछ मांगने को कहा।
- तब वामन देव ने राजा बलि से तीन पग भूमि देने का आग्रह किया। राजा बलि ने सोचा बालक ब्राह्राण के तीन पग होते ही कितने हैं। उन्होंने सोचा कि मैं तीनों लोकों का स्वामी हूं और मेरे लिए तीन पग भूमि कोई बड़ी बात नहीं है।
- लेकिन यज्ञ स्थल पर दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य भी मौजूद थे। वे वामन देव के रूप को जान चुके थे कि ये भगवान विष्णु ब्राह्राण के वेश में हैं। दैत्य गुरु शुक्राचार्य राजा बलि को ऐसा वचन देने से मना कर रहे थे। लेकिन गुरु की सलाह को नजरअंदाज करते हुए राजा बलि ने वामन देव को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।
- तब वामन देव ने अपने पहले पग से पृथ्वी और दूसरे पग से आकाश को नाप लिया। अब एक पग नापने के लिए बच गया तब राजा बलि ने कहा कि वामन देव आप तीसरा पग मेरे सिर पर रख सकते हैं। जब भगवान विष्णु जो कि वामन अवतार में उन्होंने जैसे ही तीसरा पग बलि के सिर पर रखा वह पाताल चला गया।
- राजा बलि की दान वीरता को देखकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल का स्वामी बनते हुए वचन दिया कि चार माह के लिए वे स्वयं पाताल लोक में निवास करेंगे।