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Uttarkhand Char Dham: केदारनाथ, बदरीनाथ , मां गंगा और यमुना जी आरती संग्रह

Sun, 31 May 2020 10:04 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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kedarnath dham - फोटो : amar ujala
  • आरती श्री केदारनाथ जी की


जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुख हरम्,

गौरी गणपति स्कंद नंदी, श्री केदार नमाम्यहम्।

 

शैली सुंदर अति हिमालय, शुभ मंदिर सुंदरम्,

निकट मंदाकिनी सरस्वती जय केदार नमाम्यहम्।

 

उदक कुंड है अधम पावन रेतस कुंज मनोहरम्,

हंस कुंड समीप सुंदर जै केदार नमाम्यहम्।

 

अन्नपूर्णा सहं अर्पणा काल भैरव शोभितम्,

पंच पांडव द्रोपदी सम जै केदार नमाम्यहम्।

 

शिव दिगंबर भस्मधारी अर्द्धचंद्र विभुषितम्

शीश गंगा कंठ फणिपति जै केदार नमाम्यहम्।

 

कर त्रिशूल विशाल डमरू ज्ञान गान विशारद्,

मदमहेश्वर तुंग ईश्वर रूद्र कल्प गान महेश्वरम्।

 

पंच धन्य विशाल आलय जै केदार नमाम्यहम्,

नाथ पावन है विशालम् पुण्यप्रद हर दर्शनम्,

 

जय केदार उदार शंकर पाप ताप नमाम्यहम्।

 

 

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badrinath dham - फोटो : amar ujala
  • आरती श्री बदरीनाथ जी की


पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम्

निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।

शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम्।

शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम्।

जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।

इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम्।

सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।

यक्ष किन्नर करत कौतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम्।

श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।

कैलाश में एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम्।

राजयुधिष्ठिर करत स्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।

श्री बद्रजी के पंच रत्न पढ्त पाप विनाशनम्।

कोटि तीर्थ भवेत पुण्य प्राप्यते फलदायकम् ।

 

 

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- फोटो : अमर उजाला
  • आरती श्री यमुना जी की

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता,
नो नहावे फल पावे सुख सुख की दाता |ॐ

पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा,
जो जन शरण से कर दिया निस्तारा |ॐ

जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे,
यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे |ॐ

कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही,
तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही |ॐ

आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो,
नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो |ॐ

नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी,
मन ‘बेचैन’ भय है तुम बिन वैतरणी |ॐ

 


 
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- फोटो : अमर उजाला
  • श्री गंगा मां की आरती

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता...


चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता...


पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता...

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।
ॐ जय गंगे माता...

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता...
ॐ जय गंगे माता...।।
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