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जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल

Thu, 24 Jan 2013 02:05 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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ज्योतिषशास्त्र के साथ ही साथ पुराणों में भी बुध को चन्द्रमा का पुत्र बताया गया है। नवग्रहों में बुध को युवराज का पद दिया गया है। पुराणों में बुध के विवाह के विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा का वर्णन किया गया है। बुध की पत्नी का नाम ईला है। ईला के विषय में बताया गया है कि यह वैवस्वत मनु के पुत्र थे। इनका नाम इल था।
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कथा के अनुसार इल एक बार शिकार खेलने वन में गये। अनजाने में ही वह अम्बिका नामक वन में पहुंच गये। अम्बिका वन भगवान शिव द्वारा शापित था। एक बार शिव और पार्वती इस वन में विहार कर रहे थे उसी समय ऋषियों का एक समूह वन में आ पहुंचा। इससे पार्वती शर्मा गयी। शिव जी को ऋषियों का अचानक वन में प्रवेश करना अच्छा नहीं लगा और उन्होंने शाप दे दिया कि, शिव परिवार के अलावा अम्बिका वन में जो भी प्रवेश करेगा वह स्त्री बन जाएगा।

भगवान शिव के शाप के कारण राज इल स्त्री बन गये। अपने बदले हुए रूप को देखकर इल बहुत दुःखी हुए। वन से बाहर निकलने पर उनकी मुलाकात बुध से हुई। बुध राज इल के स्त्री रूप पर मोहित हो गये। इल ने अपना नाम ईला रख लिया और बुध से विवाह कर लिया। ईला और बुध से पुरूररवा का जन्म हुआ। पुराणों में बताया गया है कि पुरूरवा बड़े होकर राजा बने, इनकी राजधानी गंगा तट स्थित प्रयाग थी।
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राजा पुरूररवा को एक दिन माता ईला ने दुःखी होकर अपने स्त्री बनने की कथा बतायी। इसके बाद पुरूरवा ने निश्चय किया कि वह अपनी माता को वास्तविक रूप में लाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए पुरूरवा ने गौतमीगंगा यानी गोदावरी तट पर शिव की उपासना की। पुरूरवा की उपासना से प्रसन्न होकर शिव और पार्वती प्रकट हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। पुरूरवा ने शिव से कहा कि उनकी माता ईला पुनः राजा इल बन जाए। इस पर भगवान शिव ने वरदान दिया कि गौतमी गंगा में स्नान करने से ईला पुनः इल बन जाएगी। ईला ने गौतमी गंगा में स्नान किया और पुनः राज इल बन गयी।
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