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चौबीस अवतारों में सिमटी दुनिया

Fri, 07 Feb 2020 03:51 PM IST
योगेश जोशी आचार्य श्रीराम शर्मा
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अवतारों की गणना कई प्रकार से की गई है। शास्त्रों में अवतारों के जो नाम बताए गए हैं, उनमें एकरूपता नहीं है। दस अवतारों के संबंध में जो मान्यता है, वह चौबीस अवतारों के बारे में नहीं है। गायत्री के अक्षरों के अनुसार उनकी संख्या विभिन्न संदर्भों में 24 है। इसे अधिक भी माना जाता है, लेकिन प्रतिपादनों के आधार पर 24 अवतारों के बारे में तो सहमति है ही। जहां भी इनका उल्लेख है, 24 की संख्या ही सबसे अधिक प्रचलित है।
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जिन 24 अवतारों की गणना की गई है, उनके नाम इस प्रकार है- नारायण विराट, हंस, यज्ञ पुरुष, मत्स्य, कर्म, वराह, वामन, नृसिंह, परशुराम, नारद, धन्वन्तरि, सनत्कुमार, दत्तात्रेय, कपिल, ऋषभदेव, हयग्रीव, मोिहनी, हरि, प्रभु, राम, कृष्ण, व्यास, बुद्ध और निष्कलंक।
  

 'मार्कंडेय पुराण' में शक्ति की कथा है। सभी देवताओं से तेज एकत्रित किया गया और उनकी सम्मिलित शक्ति का संग्रह- समुच्चय आदि-शक्ति के रूप में प्रकट हुआ। इससे स्पष्ट है कि स्वरूप एक रहने पर भी उसमें घटकों का समावेश है। गायत्री की विभिन्न शक्ति धाराओं के आधार पर कहा जा सकता है कि उस महासमुद्र में कई महा नदियों ने अपना अनुदान दिया है। उनकी विशेषताएं भी इसमें विद्यमान हैं। 24 शब्दों को शक्तियों का एकीकरण कह सकते हैं।
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ये धाराएं कई स्तरों की हैं, बहुत-सी दिशाओं से आई हैं और अनेक विशेषताओं से युक्त हैं। उन वर्गों का उल्लेख अवतारों, देवताओं, दिव्य शक्तियों और ऋषियों के रूप में हुआ है। शक्तियों में कुछ भौतिक हैं, कुछ आत्मिक। इनके नामकरण उनकी विशेषताओं के अनुरूप ही हुए हैं।   
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