आज देवउठनी एकादशी है। हिंदू धर्म में सभी एकादशी में देवउठनी एकादशी को बहुत ही श्रेष्ठ और शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादि पर भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद जागते हैं और सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, आराधना और तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पूजनीय और पवित्र माना जाता है। हर घर के आंगन में तुलसी के पौधे को लगाया जाता है। वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद में तुलसी के पौधे का खास महत्व होता है। इससे वास्तु संबंधी दोष खत्म होते हैं। देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के अवसर पर आइए जानते हैं तुलसी के पौधे जुड़ी सभी महत्पूर्ण जानकारियां ।
-तुलसी के पौधे को हर घर में लगाने का जितना महत्व होता है उतना इस बात का महत्व होता है इसका पौधा घर के किस दिशा में लगना बेहतर रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी के पौधे को घर की उत्तर दिशा में लगना सबसे शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा में तुलसी के पौधे को लगाने से बचना चाहिए।
-तुलसी के पौधे के साथ शालिग्राम रखना अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे के पास शालिग्राम होते हैं वहां पर सभी देवी-देवताओं का वास होता है।
- रोजाना स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे को जल अर्पित करना चाहिए और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए शाम के समय इस पौधे को छूना नहीं चाहिए।
- शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु और बाल गोपाल को हर दिन भोग लगाते समय तुलसी के पत्ते को जरूर साथ में रखना चाहिए। बिना तुलसी दल के न तो भगवान विष्णु और न ही बाल गोपाल भोग स्वीकार करते हैं।
- भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा में कभी भी तुलसी के पौधे के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी के पौधे में वास्तु दोष को दूर करने की क्षमता होती है। जिन घरों में तुलसी का पौधा होता है और नियमित रूप से पूजा होती है, वहां पर वास्तु दोष दूर होता है। इससे आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। घर के आसपास सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहता है।
- तुलसी के पत्ते को कभी एकादशी, रविवार, और ग्रहण के समय तोड़ना नहीं चाहिए। अगर आपको इन तिथियों पर भगवान के भोग के लिए तुलसी के पत्तों की जरूरत हो तो तुलसी के पौधे के पास गिरे पत्तों को उठाकर और पानी से धोकर पूजा में प्रयोग करना चाहिए।
- घर में कभी भी सूखा तुलसी का पौधा नहीं रखना चाहिए। अगर आपका तुलसी का पौधा सूख जाय तो उसको किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। नियमित रूप से तुलसी के पौधे की देखभाल करना चाहिए।
- बिना किसी कारण तुलसी के पत्तों को कभी भी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने से दोष लगता है। इससे घर पर माता लक्ष्मी का वास नहीं होता है।
तुलसी मंत्र
तुलसी मां पर जल चढ़ाते समय 'ॐ-ॐ' मंत्र का 11 या 21 बार जाप किया जाना चाहिए।
तुलसी का पत्ता तोड़ते समय ॐ सुभद्राय नम:, मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी,नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते।। मंत्र का जाप करें।
जीवन में सफलता पाने के लिए महाप्रसादजननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।। मंत्र का जाप करें।