तुलसी का सूखना किस बात का संकेत है?
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Tulsi Niyam In Hindi: सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना जाता है। हर घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाया जाता है। इसके बिना घर का आंगन अधूरा माना जाता है। तुलसी के अनगिनत लाभ हैं, वहीं धार्मिक शास्त्रों में तुलसी को बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है। तुलसी भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी दोनों को प्रिय है। इसलिए तुलसी को हरिप्रिया भी कहा जाता है। तुलसी को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने से व्यक्ति को ढेरों लाभ मिलते हैं। हालांकि कई लोगों के घर में तुलसी का पौधा बार-बार सूख जाता है, या ज्यादा दिन तक सही अवस्था में नहीं रह पाता। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह किसी बात का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि अगर आपके घर की तुलसी बार-बार सूख जाती है, तो यह किस बात का संकेत देती है। साथ ही जानेंगे कि तुलसी को हरा भरा कैसे रखा जा सकता है।
तुलसी का सूखना किस बात का संकेत?
अगर समय पर जल देने के बाद भी घर में तुलसी का पौधा सूख जाता है या पूजा पाठ के बाद भी सूख रहा है, तो यह घर में किसी परेशानी के आने का संकेत देता है।
क्या तुलसीदल कभी बासी होती हैं?
स्कन्द पुराण के अनुसार बासी फूल और बासी जल से कभी भी पूजा नहीं करनी चाहिए। इनसे पूजा करना वर्जित है, लेकिन अगर आपने तुलसी तोड़कर रखी हो, तो इसे बासी नहीं माना जाता है। इसे कभी अपवित्र या बासी नहीं माना जाता है। तुलसीदल और गंगाजल कभी बासी नहीं होते।
अशुद्ध अवस्था में न छुएं तुलसी
तुलसी को कभी भी अशुद्ध अवस्था में नहीं छूना चाहिए। इससे भी बार-बार तुलसी का पौधा सूखने लगता है। इसके अलावा तुलसी के पास गंदे कपड़े सुखाने और चप्पल पहनकर निकलने से भी तुलसी सूख जाती है। तुलसी पर रोज दीपदान न करना भी इसके एक कारण है। तुलसी को हर दिन शाम को दीपदान करना चाहिए।
तुलसी को सूखने से कैसे बचाएं?
घर में सबसे पहली नजर तुलसी को लगती है, इसलिए तुलसी का पौधा सबसे पहले सूख जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि तुलसी की जड़ में हल्दी और गंगाजल डालने से तुलसी खराब नहीं होती। तुलसी के पौधे को ठंडी हवा और पाले से बचाने के लिए किसी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जहां धूप भी आती हो और और सीधी हवा भी न लगती हो। सर्दियों के मौसम में इस पौधे को किसी झीने कपड़े से ढक कर रखना चाहिए। तुलसी के पौधे में सर्दी के मौसम में मंजरी ज्यादा निकलती हैं। इसे समय-समय पर हटाते रहना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।