शनिवार 15 तारीख को अमवस्या तिथि पड़ रही है। इससे शनिवार का महत्व बढ़ गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि शनिवार के दिन पड़ने वाली अमवस्या शनिश्चरी अमवस्या कहलाती है। शनिवार के दिन शनि ग्रह से संबंधित उपाय करने से जो लाभ मिलता है उससे कई गुणा अधिक लाभ शनिश्चरी अमवस्या के दिन शनि की पूजा से मिलता है। इस अमवस्या के दिन पितृ दोष से मुक्ति के भी उपाय किये जा सकते हैं। पितृ दोष शांति के लिए भी इसे उत्तम कहा गया है।
शनि की शांति किसके लिए
शनिश्चरी अमवस्या कन्या, तुला एवं वृश्चिक राशि वालों के लिए बहुत ही खास है। इन तीनों राशियों पर इन दिनों शनि की साढ़ेसाती चल रही है। इसके अलावा कर्क एवं मीन राशि वालों की ढैय्या चल रही है। इन पांचों राशि वालों को इस सुअवसर का लाभ उठाना चाहिए। पं विनोद त्यागी के अनुसार शनि की शांति के लिए शनि पीड़ित व्यक्तियों को सात साबूत बादाम शनि मंदिर में जाकर चढ़ाना चाहिए।
शनि की शांति के लिए कच्चा नारियल एवं काली बाती में तिल के तेल का दीपक जलाना भी उत्तम रहेगा। इस दिन दशरथ कृत शनि स्तोत्र का ग्यारह बार पाठ करने से कुण्डली में मौजूद शनि का अशुभ प्रभाव दूर होता है। जिन कन्याओं के विवाह में शनि दोष के कारण विलंब हो रहा है। ऐसी कन्याओं के अभिभावक को काले रंग का चमड़े का जूता किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
पितृ शांति के लिए उपाय
जो दंपती विवाह के कई साल बाद भी संतान सुख से वंचित हैं उन्हें शनि अमवस्या के मौके पर पितृ शांति के उपाय करने चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों के नाराज होने पर संतान सुख में बाधा आती है। प्रगति में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है तथा घर में सुख-शांति का अभाव रहता है।
पितरों की प्रसन्नता के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे पीपल के एक पत्ते पर पांच तरह की मिठाईयां रखकर पितरों का ध्यान करें। घी का एक दीपक जलाएं। पितरों से प्रार्थना करें कि वह प्रसन्न हों और संतान सुख का आशीर्वाद प्रदान करें।
शास्त्रों के अनुसार शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष पर सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन पीपल की पूजा करने से पितरों के अलावा अन्य देवी-देवता भी प्रसन्न होंगे। इससे आपके जीवन में आ रही परेशानी दूर होगी।