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बृहस्पतिवार का व्रत करने से आती है सुख-समृद्धि, जानिए व्रत पूजा विधि

Wed, 28 Apr 2021 08:09 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बृहस्पतिवार व्रत की विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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गुरुवार (बृहस्पतिवार) का व्रत बेहद ही शुभफलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु (बृहस्पतिदेव) और केले के वृक्ष का पूजन किया जाता है। इस दिन पूजन और व्रत करने के कुंडली में गुरू की स्थिति अचछी होती है। गुरू को आध्यात्मिकता, सफलता और समृद्धि का कारक माना जाता है। गुरूवार का व्रत करने से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। बृहस्पति की स्थिति मजबूत होने से विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं इसलिए जिनके विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो उसे बृहस्पतिवार का व्रत करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं बृहस्पतिवार व्रत की विधि।

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बृहस्पतिवार व्रत पूजन विधि
  • बृहस्पतिवार को प्रात: जल्दी उठकर स्नानादि कर लें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। 
  • इसके बाद बृहस्पतिदेव के समक्ष या केले के वृक्ष में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • भगवान को हल्दी या फिर चंदन का तिलक करें और धूपबत्ती जलाएं।
  • अब मुनक्का, चने की दाल पीले फूल और गुड़ अर्पित करें या फिर प्रसाद में बेसन के लड्डू भी चढ़ा सकते हैं।
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  • इसके बाद हाथ में थोड़ी सी चने की दाल और फूलों को अपने हाथों में लेकर बृहस्पतिवार के व्रत की कथा पढ़ें। 
  • कथा पूर्ण होने के बाद आरती करें। इसके बाद पूरे दिन फलाहार व्रत करें। 
  • इस दिन पीले वस्त्र, पीले फलों और पीले भोजन का प्रयोग करना चाहिए। 
  • शाम के समय पुनः पूजा करें और बिना नमक का भोजन करके व्रत पारण करें। 
  • आप 7 या 9 व्रत करने के बाद या फिर अपनी मनोकामना के अनुसार व्रत पूर्ण करने के बाद व्रत का उद्यापन कर सकते हैं।
  • इस दिन केले के वृक्ष का पूजन किया जाता है इसलिए केले का सेवन नहीं करना चाहिए। केले का दान किया जा सकता है।
  • इसके साथ ही बृहस्पतिवार के दिन घर में साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और साथ ही बाल भी नहीं धोने चाहिए।
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