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मां दुर्गा घोड़े पर आएंगी, हाथी से विदा होगी

Wed, 26 Sep 2012 12:54 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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शास्त्रों में कहा गया है कि मां गौरी और दुर्गा एक ही हैं। इनके कई रूप हैं जिनकी पूजा नवरात्र के नौ दिनों में करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसका कारण यह है कि नवरात्र के नौ दिनों में माता पृथ्वी पर निवास करती हैं।
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महालया के दिन माता कैलाश से पृथ्वी के लिए यात्रा आरंभ करती हैं और अगले दिन यानी कलश स्थापन के दिन पृथ्वी पर पहुंच जाती हैं। माता का वाहन शेर माना गया है लेकिन हर वर्ष पृथ्वी पर आने के लिए माता अलग-अलग वाहनों का चुनाव करती हैं। माता का वाहन तिथि के अनुसार होता है।

शास्त्रों में कहा गया है 'शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता' इसका अर्थ है सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापन होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं। शनिवार तथा मंगलवार को कलशस्थापन होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता नाव पर सावर होकर आती हैं।
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माता जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं उसके अनुसार वर्ष का आंकलन किया जाता है। इस वर्ष कलश स्थापन 16 अक्तूबर यानी मंगलवार के दिन है। इसलिए इस वर्ष माता घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं। घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है। घोड़े पर माता का आगमन शासन और सत्ता के लिए अशुभ माना गया है। इससे सरकार को विरोध का सामना करना पड़ता है और सत्ता परिवर्तन का योग बनता है।

विजयादशमी के दिन बुधवार है। शास्त्रों के अनुसार बुधवार के दिन विजयादशमी होने पर माता हाथी पर सवार होकर वापस कैलाश की ओर प्रस्थान करती हैं। माता की विदाई हाथी पर होने से आने वाले साल में खूब वर्षा होगी।
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