शरीर का एक आकार होता है, लेकिन मन का कोई आकार नहीं होता। इसलिए मन के साथ जो चाहें कर सकते हैं।
हर पल आपके विचार इधर से उधर भटकते रहते हैं, क्योंकि मन का कोई आकार नहीं होता। जीवन की दिशा उस समय तय कीजिए, जब आप खुश हों, बेहतर हों और आपकी सोच बिल्कुल साफ हो। उसके बाद आप जो भी तय करें, उसमें बदलाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि शरीर का एक आकार होता है, लेकिन मन का कोई आकार नहीं होता।
इसलिए मन के साथ जो चाहे, कर सकते हैं। अगर आप जीवन की दिशा नहीं तय करते, तो रोज आपका मन बदलता रहेगा और आपको लगेगा कि जीवन की दिशा बदलने की जरूरत है। उदाहरण के लिए बादल हर पल अपना आकार बदलते रहते हैं। बादलों का आकार बदलना समस्या नहीं है, लेकिन अगर हवा दिशा बदलती है और बादल वहां नहीं जाते, तो यह एक समस्या है।
यही बात सब पर लागू होती है। मन आकार बदल रहा है, समस्या यह नहीं है। समस्या यह है कि यह अपनी दिशा बदल रहा है। अपने जीवन की दिशा पूरी तरह से खुद तय कीजिए। अपनी दिशा तय करें, चाहे वो दिशा जो भी हो। इसके बाद इसे रोज-रोज नहीं बदलना चाहिए। कोई बात नहीं कि आपने जीवन की जो दिशा तय की है, वह काम आ रही है या नहीं। आप अपने जीवन की दिशा तय कीजिए। एक बार अगर जीवन की दिशा तय हो गई, तो मन का आकार बदलना आपको अवसाद या निराशा की बजाय रचनात्मकता की ओर ले जाएगा। मन को आकार बदलने दीजिए, इसमें कोई समस्या नहीं है।