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Surya Mantras: भगवान भास्कर को प्रसन्न करने के लिए रविवार को इन मंत्रों का करें जाप, मिलेगी यश और कीर्ति

Sun, 17 Nov 2024 07:25 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सूर्य देव को नवग्रहों का राजा माना जाता है। उनकी पूजा-उपासना से न केवल यश और कीर्ति प्राप्त होती है, बल्कि स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है। सूर्य देव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
 
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सूर्य देव को प्रसन्न करने के उपाय - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Raviwar Ke Upay In Hindi: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित होता है। ऐसे में रविवार का दिन सूर्य देवता को अर्पित किया गया है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। उनके भक्त व्रत रखते हैं और प्रातःकाल स्नान करके पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा स्थल को स्वच्छ कर सूर्य देव की चालीसा, आरती और स्तुति का पाठ किया जाता है।
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सूर्य देव की महिमा
सूर्य देव को नवग्रहों का राजा माना जाता है। उनकी पूजा-उपासना से न केवल यश और कीर्ति प्राप्त होती है, बल्कि स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है। सूर्य देव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रविवार की पूजा-विधि
प्रातः स्नान और स्वच्छता: रविवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थान को साफ करें।
सूर्य को अर्घ्य दें: तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें गुड़ और लाल फूल डालें और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें।
मंत्र जाप: सूर्य देव की स्तुति के लिए प्रभावशाली मंत्रों का जाप करें।
"ॐ सूर्याय नमः"
"ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"
चालीसा और आरती का पाठ: सूर्य चालीसा और आरती पढ़ें।
सूर्य पूजा के लाभ
सेहत में सुधार: सूर्य की उपासना से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
यश और कीर्ति: नियमित पूजा से मान-सम्मान और सफलता प्राप्त होती है।
सकारात्मक ऊर्जा: सूर्य देव की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
नवग्रह दोष का निवारण: सूर्य पूजा से कुंडली में सूर्य दोष और अन्य ग्रहों की अशुभता कम होती है।
रविवार को सूर्य देव की नियमित पूजा-उपासना से जीवन में उन्नति और शांति मिलती है। उनके मंत्रों और स्तुति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर अद्भुत रूप से पड़ता है।
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सूर्य प्रार्थना मंत्र
ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।
विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।।
 

सूर्य देव के 12 मंत्र

ॐ सूर्याय नम:।
ॐ भानवे नम:।
ॐ रवये नम:।
ॐ पूष्णे नम:।
ॐ मित्राय नम:।
ॐ आदित्याय नम:।
ॐ खगाय नम:।
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।
ॐ सावित्रे नम:।
ॐ मारीचाय नम:।
ॐ भास्कराय नम:।
ॐ अर्काय नम:।
 

सूर्य देव की स्तुति

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन।।

सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
 

सूर्य देव के अन्य शक्तिशाली मंत्र

ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
ॐ घृणि सूर्याय नम:
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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