हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने के घर में समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां कम हो जाती हैं।
Importance of Tulsi on Surya Grahan: आज 25 अक्तूबर को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण आरंभ होने से 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान वातावरण में उपस्थित चीजें नकारात्मक असर डालती है। इसीलिए सूतक काल को दूषित काल भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूतक काल शुरु होने से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक के समय में न ही भोजन बनाया जाता है और न ही खाया जाता है। यदि रात का भोजन बचा है तो उसे सुरक्षित रखने के लिए तुलसी का पत्ता डाल दिया जाता है। लेकिन ग्रहण के दौरान खाने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते क्यों डाले जाते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक और दूषित किरणें फैली हुई होती हैं जो सेहत के लिए हानिकारक मानी गई हैं। इसीलिए सूतक लगने पर खाने-पीने की सभी चीजों में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रहण की सभी तरह की नकारात्मक किरणें खाने-पीने की चीजों पर नहीं होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सभी तरह के खाने-पीने की चीजों में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए से खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं।
आयुर्वेद में भी तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व है। तुलसी में एंटी-बैक्टीरिया और आयरन तत्व बहुत होते हैं। इसका सेवन करने से व्यक्ति की प्रतिरोधकक्षमता में इजाफा होता है।
लेकिन जब भी ग्रहण लगे तब तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
ग्रहण से एक दिन पूर्व तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें।
ग्रहण के अलावा रविवार और अमावस्या के दिन भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।
तुलसी के स्वयं के गिरे हुए पत्तों का ही प्रयोग करना चाहिए।