आठारह पुराणों में से परम पवित्र पुराण है श्रीमद्भागवत महापुराण। इस महापुराण में भगवान विष्णु के अवतार और श्रीकृष्ण की लीला कथाओं के अलावा भगवान के भक्त और उनकी मुक्ति की कथाएं भी मौजूद हैं। इसी महापुराण में एक प्रभु भक्त की कथा है जिसे पूर्वजन्म की सभी बातें याद थी।
इन्हीं यादों के कारण राजवंश में जन्म लेने के बाद भी वह सुख और भोगों में लिप्त नहीं हुआ और ऐसे उपाय किए कि माता-पिता को उन्हें घर छोड़ने का आदेश देना पड़ा।
माता-पिता के आदेश से दुःखी होने की बजाय उस प्रभु भक्त ने भगवान को धन्यवाद दिया कि उसे गृह मोह से मुक्त होकर संन्यास ग्रहण करने का अवसर मिला है जिससे वह पूर्वजन्म गलतियों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त हो सके।