शास्त्रों में कई ऐसी कथाएं हैं जिनमें यह बताया गया है कि व्यक्ति का लिंग परिवर्तित हो गया और वह पुरुष से स्त्री बन गया। ऐसी ही एक कथा है राजा भंगस्वान की। इनके पुरुष से स्त्री बनने के पीछे यह कहानी है कि सौ पुत्रों की प्राप्ति के लिए राजा भंगस्वान ने एक यज्ञ का आयोजन किया।
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यज्ञ के अंत में जब सभी देवताओं को बलि अर्पित किया जा रहा था। राजा ने इंद्र को बलि के लिए नहीं बुलाया। इससे इंद्र नाराज हो गए। इंद्र ने उस झील पर मायावी विद्या का प्रयोग कर दिया जिसमें यज्ञ के बाद राजा स्नान कर रहा था।
राजा भंगस्वान जब झील से बाहर आए तो उनका व्यक्तित्व ही बदल चुका था। अब वह एक स्त्री रुप में नजर आ रहे थे। इससे दुःखी होकर भंगस्वान वन में चला गया। कुछ समय बाद इन्होंने एक संन्यासी से विवाह कर लिया जिससे स्त्री बनी भंगस्वान को सौ पुत्रों की प्राप्ति हुई।
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इसके बाद एक बार इंद्र ने भंगस्वान पर दया करके उसे पुरुष रुप वापस देने की बात कही। राज ने पुरुष रुप में लौटने से इंकार कर दिया, राजा ने इंद्र से कहा उन्हें स्त्री रुप में ही अधिक आनंद मिल रहा है।