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महाभारत के खलनायक दुर्योधन के पैदा होने की कहानी चौंका देगी आपको

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महाभारत युद्ध का खलनायक दुर्योधन को माना जाता है। इसका कारण यह है कि दुर्योधन की जिद्द और महत्वाकांक्षा के कारण बार-बार पांडवों को वन जाना पड़ा और कष्टपूर्ण जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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परिणाम यह हुआ कि कौरवों और पांडवों के मन में एक दूसरे के प्रति ऐसा जहर फैला कि महायुद्ध की तैयारी शुरु हो गई। दुनिया भर के देश दो भागों में बंट गए। एक पक्ष कौरवों के साथ था तो दूसरा पांडवों के और फिर एक ऐसा दिन आया जब दुनिया भर के योद्धा करुक्षेत्र के मैदान में इकट्ठा हुए और उनमें महायुद्ध हुआ।

इस युद्ध ने लाखों करोडों लोगों को मौत के घाट सुला दिया। यही कारण है कि दुर्योधन को महाभारत युद्ध का खलनायक कहा जाता है। कुछ ऐसी कथाएं मिलती हैं जिससे पता लगता है कि दुर्योधन के जन्म के समय ही यह तय हो गया था कि यह कुल का नाश करने वाला खलनायक बनेगा।
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तब दासी ने क‌िया गांधारी के गर्भ पर प्रहार

महाभारत में ऐसी कथा है क‌ि ह‌स्त‌िनापुर के उत्तराध‌िकारी को लेकर पांडु और धृतराष्ट्र दोनों च‌िंत‌ित थे। दोनों ही चाहते थे क‌ि उनका पुत्र बड़ा हो ताक‌ि वह हस्त‌िनापुर का उत्तराध‌िकारी बने। गांधारी भगवान श‌िव की भक्त थी। उन्हें सौ पुत्रों की माता होने का आशीर्वाद प्राप्त था।

संयोग यह हुआ क‌ि पांडु की पत्नी और कुंती और धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी दोनों गर्भवती हुई। लेक‌िन भाग्य ने पांडु का साथ द‌िया और सबसे पहले पांडु के घर युध‌िष्‍ठ‌िर का जन्म हुआ।

इससे धृतराष्ट्र और उनकी पत्नी गांधारी बहुत दुःखी हुई। गांधारी को दुखी देखकर महर्ष‌ि व्यास ने कहा तुम्हें श‌िव जी का आशीर्वाद प्राप्त है इसल‌िए च‌िंत‌ित नहीं हो तुम सौ पुत्रों की माता बनोगी। समय ब‌ितता रहा और कुंती ने दूसरी बार गर्भ धारण क‌िया लेक‌िन गांधारी के गर्भ से बच्चे का जन्म नहीं हुआ।

इससे दुखी होकर गांधारी ने अपनी दासी को पेट पर वार करने के ल‌िए कहा। दासी ने महारानी की आज्ञा से पेट पर खूब प्रहार क‌िया। इससे गांधारी के गर्भ से मांस का एक प‌िंड ग‌िरा।

इस तरह पैदा हुआ दुर्योधन

अपने गर्भ से ग‌िड़े प‌िंड को देखकर गांधारी रोने लगी। उसी समय महर्ष‌ि वेदव्यास वहां पहुंचे। व्यास जी ने गांधारी को सांत्वना देते हुआ कहा क‌ि तुम्हें रोने की जरुरत नहीं है इन्हीं प‌िंडों से सौ पुत्रों का जन्म होगा।

व्यास जी ने कहा क‌ि इस प‌िंड को सौ टुकडों में काट दो और सौ घडों में घी भरकर उनमें बंद करके रख दो। इससे सौ पुत्रों का जन्म होगा। गांधारी ने उस समय एक पुत्री की इच्छा भी जताई। इसल‌िए प‌िंड को एक सौ एक टुकडों में काटा गया।

नौ महीना बाद जब कुंती ने भीम को जन्म द‌िया। उसी समय एक घड़ा फूट और उसमें से दुर्योधन का जन्म हुआ। दुर्योधन के जन्म के साथ ही कुछ अजब घटनाएं होने लगी ज‌िससे राज पंड‌ित और व‌िदुर च‌िंत‌ित हो उठे।
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दुर्योधन के जन्म के समय हुआ यह अपशकुन

दुर्योधन के पैदा होते ही आसमान में काले बादल छा गए और राजमहल के पास आकर स‌ियार जोर जोर से रोने लगे। स‌ियारों की आवाज को सुनकर एक भय और अपशुगन का माहौल बनता जा रहा था।

स‌ियारों को सैन‌िक भगा देते लेक‌िन वह फ‌िर आकर रोने लगते। इसे देखकर राजपंड‌ितों ने कहा क‌ि बालक का जन्म अशुभ घड़ी में हुआ है और यह कुल का नाश करने वाला होगा। यह अगर राजमहल में रहा तो कुल का अंत हो जाएगा।

महामंत्री व‌िदुर ने धृतराष्ट्र को सलाह दी क‌ि इस बालक को अपने से दूर कर दें। लेक‌िन धृतराष्ट्र ने संतान मोह में ऐसा नहीं होने द‌‌िया और पर‌िणाम यह हुआ क‌ि दुर्योधन ने धीरे-धीरे महायुद्ध को आमंत्रण दे द‌‌िया और वही हुआ जो भाग्य चाहता था। दुर्योधन कुल का नाश करने वाला बन गया।

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