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सोमवार की यह अमावस्या है बहुत ही खास, जानिए क्या है महत्व

Sat, 23 Aug 2014 12:08 PM IST
पं. जयगोविंद शास्त्री/ज्योतिषशास्त्री
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चंद्रमा को सोमरूपी पितृ, सभी प्रकार की औषधियों का स्वामी तथा जीव-जगत के मन का अधिकारी कहा गया है। प्राणियों के जीवन में रोग-आरोग्य, हानि-लाभ, जीवन-मरण के प्रकार, यश-अपयश का सीधा संबंध जातकों की जन्मकुंडलियों में चंद्रमा की स्थिति से है। आरंभ में सभी तिथियों के अधिपति सूर्यदेव ने तिथियों को अन्य देवताओं में बांट दिया।
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जिनमे अमावस्या के अधिपति अमावसु नामक पितर को बनाया गया। इन पितरों में सोम एवं अग्निष्वात सर्वोपरि कहे गए हैं। इन्हीं सोम के दिन जब अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। चंद्रमा का जल के प्रति चुंबकीय प्रभाव रहता है जिसका संबंध जीवों में उपस्थित द्रव पदार्थ रूपी रक्त से है अतः इसदिन अन्य दिनों की अपेक्षा वैराग्य का भाव प्रबल रहता है।

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यह दिन मानसिक दोषों से मुक्ति पाने के लिए उत्तम माना गया है। इस दिन पितृदोष से मुक्ति के निमित्त किया गया पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य आदि का विशेष महत्व रहता है। मौनव्रत रखने और पीपल की पूजा के साथ 108 परिक्रमा करने से कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। पीपल को विष्णु स्वरूप माना जाता है सोमवार भगवान रूद्र को भी अति प्रिय है अत: सोमवती अमावस्या के दिन रुद्राभिषेक करने से शिव की अति कृपा मिलती है।
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